सिलीगुड़ी : प्रतिबंध के बावजूद हुक्का बार में कश लगा रही युवा पीढ़ी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jul 2019 1:50 AM

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जितेन्द्र पांडेय, सिलीगुड़ी : शहर में कुकुरमुत्ते की तहर हुक्का बार खुल गये है. युवाओं की हुक्के के प्रति रूची को भांप नशे के कारोबारियों ने इसे भुनाने के लिए सांकेतिक नामों से हुक्का बार खोल कर अपनी जेब भरना शुरू कर दिया है. हुक्का बारों में हुक्के की कश ले हवा में धुएं को […]

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जितेन्द्र पांडेय, सिलीगुड़ी : शहर में कुकुरमुत्ते की तहर हुक्का बार खुल गये है. युवाओं की हुक्के के प्रति रूची को भांप नशे के कारोबारियों ने इसे भुनाने के लिए सांकेतिक नामों से हुक्का बार खोल कर अपनी जेब भरना शुरू कर दिया है. हुक्का बारों में हुक्के की कश ले हवा में धुएं को छल्ले की तरह उड़ाने वालों की भीड़ लगी रहती है.

सिलीगुड़ी का कोई ऐसा इलाका नहीं है. जहां हुक्का बार न खुला हो. हुक्का बार खोलना मतलब मुनाफा ही मुनाफा . फिर हुक्का बार वाले हुक्का बार से तौबा क्यों करे. लड़ाकों के साथ लड़कियां भी हुक्का के कश लेने से पीछें नहीं है.
खास कर कॉलेज व स्कूल की लड़के- लड़कियां तो और आगे है. उनका जन्मदिन भी आज कल हुक्का बार में ही मन रहा है. छोटा -बड़ा कोई भी पार्टी हो हुक्का के कश के साथ ही पूरा हो रहा है.
हुक्का 200 से लेकर 1000 तक अलग -अलग फ्लेवर में उपलब्ध कराया जा रहा है. हुक्का बार वाले समाज में संदेश देते है कि हुक्का केला, सेव , आम , अनानास , नारंगी आदि फ्रूट से तैयार होता है. इस लिए ही इन फ्लेवरों में उपलब्ध है. यह हानीकारक नहीं होता है.
जाहीर सी बात है कोई भी फ्लेवर का हो. आखिर धुआं बन कर फेफड़े में ही तो जाता है. तो फिर हानिकारक कैसे नहीं हो सकता . सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के पॉश इलाके में प्रशासन के नाक के नीचें हुक्का बार चल रहे हैं और प्रशासन को भनक तक नहीं. पुलिस की मिली भगत से ही चलना संभव है.
पुलिस चाहे तो परिंदे भी पर न मार सके. फिर हुक्का बार क्या है. मालूम हो कि शहर में हुक्का बार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है . फिर भी प्रतिबंध को धुएं में उड़ा रहे हैं हुक्का बार मालिक .
फ्लेवर्ड हुक्का की दीवानी हो गयी है युवा पीढ़ी
आपने देखा होगा कि गांवों में अक्सर खटिए पर बैठकर बुजुर्ग हुक्का गुडगुडाते हैं.वैसे बुजुर्गों द्वारा हुक्का पीने की ये परंपरा सदियों से चली आ रही है.सालों से हुक्के को एक शाही शौक के तौर पर देखा जाता रहा है. शायद इसलिए आज के युवा भी इस शाही शौक के दीवाने हो गए हैं.
तभी तो आजकल हुक्के का नशा ज्यादातर युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है.लेकिन आज की ये युवा पीढ़ी फ्लेवर्ड हुक्का पीना ज्यादा पसंद करती है. युवाओं के इस बढ़ते क्रेज के चलते शहर में हुक्का बार धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं.अपनी पॉकेट मनी बचा कर ये युवा हुक्का बार में पहुंचते हैं .
हुक्का बार वाले युवाओं को ठंडक भरा एहसास दिलाने के लिए तंबाकू में मिंट का अतिरिक्त फ्लेवर मिलाते हैं.मीठे और कसैले स्वाद का आनंद लेनेवाले युवाओं के लिए तंबाकू में फलों का फ्लेवर मिलाते हैं. हुक्का बार वाले युवाओं को बीमारी परोस रहे है और युवा इसे मजा में पी रहे हैं.
पानी की जगह डालते हैं शराब
ऐसी भी खबर है कि कई लोग हुक्के में पानी की जगह शराब डालते हैं.डॉक्टरों का कहना है कि शराब व धुआं एक साथ निगलना और भी खतरनाक है.
ऐसा करना खतरे से खाली नहीं है. कई लोगों को ऐसा लगता है कि हुक्का पीना सिगरेट जितना खतरनाक नहीं होता है. जिसके कारण सभी अक्सर पब , क्लब व हुक्का बार में जा कर हुक्का पीते है. आजकल हर छोटे बड़े पब या लाउंज में हुक्का आसानी से उपलब्ध होता है.
जो लोग हुक्के को सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं. उन्हें हम यह बता देना चाहते है कि हुक्के से खींचा हुआ तंबाकू का धुआं पानी से होकर एक लंबे होज पाइप के जरिए फेंफडों तक पहुंच जाता है. इसलिए हुक्के से निकला हुआ धुआं सिगरेट के धुएं से भी अधिक खतरनाक होता है.
क्या कहना है डॉक्टर का
हुक्का पर शहर के जाने-माने डॉक्टर एस के चौधरी ने कहा कि हुक्का के धूएं से फेफड़ा व सांस की समस्या होती है. इसे ज्यादा सेवन करने पर हार्ट की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है. इसका असर युवाओं के दिमाग पर भी पड़ सकता है.
इससे बचना चाहिए. यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है. बच्चे हो या बुढे सभी को हुक्का के लत से दूर रहना चाहिए.45 मिनट सेशन में आप एक सिगरेट से 36 गुना ज्यादे टार व 70 फीसदी निकोटिन निगल जाते है.
हुक्का को लेकर कई भ्रांतियां भी है. कुछ फ्लेवर हर्बल शीशा के नाम से बिक रहे हैं. कहते हैं कि इनमें तंबाकू नहीं होती , जबकि ये सेहत के लिए काफी खतरनाक है. इन्हें चारकोल से जलाते है. जिसके धुएं के साथ कैंसर कारक तत्व शरीर में जाता है.
हुक्का के गिरफ्त में छात्र भी
युवाओं के बीच हुक्के से निकलता धुआं हुक्के के प्रति युवाओं के बढ‍ते क्रेज को अच्छी तरह से बयां करता है. ज्यादातर स्कूली बच्चे हुक्के के नशे की आदी हो रहे है.
जबकि कॉलेज जानेवाले युवा इसे शाही शौक मानकर इसका नशा करना पसंद करते हैं. फ्लेवर्ड हुक्का का क्रेज इन युवाओं के सिर इस कदर चढ़ा हुआ है कि वो कई बार स्कूल और कॉलेज ना जा कर दोस्तों के साथ हुक्का पीने के लिए हुक्का बार पहुंच जाते हैं.
बताया जाता है कि हुक्के के नशे के आदी ये युवा व्हाट्स एप के जरिए मैसेज कर अपने दोस्तों को हुक्का पीने के लिए बुलाते हैं. उनके माता-पिता को इस बात की खबर ना लगे इसके लिए कई बार ये लोग तस्बीरों का सहारा लेते है.
क्या कहा पुलिस कमिश्नर ने
सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर बी एल मीना ने कहा कि हुक्का बार चलने की जब भी शिकायत आती है .पुलिस छापेमारी करती है.अभी कोई शिकायत नहीं मिली है. यदि कोई शिकायत मिलती है, तो पुलिस छापेमारी अभियान चलाये गी.
शहर के किन-किन जगहों पर चलता है हुक्का बार
शहर में हुक्का बार प्लानेट मॉल, सिटी सेंटर,सेवक रोड, प्रधान नगर, सालुगाढ़ा , कॉलेज पाड़ा , एसएफ रोड एंव शालबाड़ी स्थित कई रेस्टोरेंटों व बारों में हुक्का परोसा जा रहा है. वह भी अवैध तरीके से. किसी के पास कोई लाईसेंस नहीं.फिर भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है. क्यों हरकत में नहीं आ रही है. मासूमों की जिदंगी बरबाद हो रही है और पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी हुई है.
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