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बिन्नागुड़ी : बंगाल के चाय श्रमिकों के साथ सर्वाधिक अन्याय : कुसुम लामा

Updated at : 08 Jul 2019 1:46 AM (IST)
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बिन्नागुड़ी :  बंगाल के चाय श्रमिकों के साथ सर्वाधिक अन्याय : कुसुम लामा

बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी के राजगंज ब्लॉक स्थित जयपुर चाय बागान के फुटबॉल मैदान में इलाके के लगभग 12 चाय बागानों के श्रमिक संगठन ‘बंगीय चाय मजदूर संघ’ के नेतृत्व में विभिन्न समस्याओं को लेकर रविवार को एक जनसभा हुई. इसमें मुख्य अतिथि भारतीय प्लांटेशन मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा बीएमएस के पश्चिम बंगाल राज्य […]

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बिन्नागुड़ी : जलपाईगुड़ी के राजगंज ब्लॉक स्थित जयपुर चाय बागान के फुटबॉल मैदान में इलाके के लगभग 12 चाय बागानों के श्रमिक संगठन ‘बंगीय चाय मजदूर संघ’ के नेतृत्व में विभिन्न समस्याओं को लेकर रविवार को एक जनसभा हुई. इसमें मुख्य अतिथि भारतीय प्लांटेशन मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा बीएमएस के पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के उपाध्यक्ष कुसुम लामा थे.

इसके अलावा उत्तर बंगाल बीएमएस श्रमिक संगठन के प्रभारी रंजन कुमार साहू एवं जलपाईगुड़ी जिला सचिव कृष्णा छेत्री, जलपाईगुड़ी जिला के अध्यक्ष तरुण राय विशेष रूप से उपस्थित थे. चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी, जमीन का पट्टा, स्वास्थ्य सुविधा, फ्री राशन, ईएसआइ की सुविधा बहाल करने जैसी मांगों को लेकर यह जनसभा आयोजित की गयी थी.
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कुसुम लामा ने कहा कि आज पूरी दुनिया के किसी भी क्षेत्र से पश्चिम बंगाल के चाय श्रमिकों की दैनिक आय कम है. चाय श्रमिक को दैनिक वेतन के रूप में केरल में 383 व कर्नाटक में 270 रुपये मिल रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह भेदभाव क्यों. उन्होंने कहा कि यहां के चाय मजदूर 146 से लेकर 176 रुपये की दैनिक मजदूरी में बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे हैं.
बहुत से चाय बागान बंद पड़े हैं, जहां से युवक-युवतियों का पलायन अन्य राज्यों में हो रहा है. इसे लेकर हमारा संगठन जल्द विभिन्न जिलों के डीएम कार्यालय का घेराव करेगा. जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या को लेकर आंदोलन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि चाय बागान बंद कर रातोरात भागनेवाले मालिकों को श्रमिक एक्ट में बदलाव करके जेल भेजने की व्यवस्था की जाये, ताकि मालिक पक्ष श्रमिकों के साथ अन्याय न कर सके.
उत्तर बंगाल बीएमएस के प्रभारी रंजन कुमार साहू ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों को न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये की जगह 3000 रुपये मिलनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दलों से प्रेरित श्रमिक संगठन आज तक चाय मजदूरों का शोषण करते ही आये हैं.
लेकिन उनका यह मजदूर संगठन अब श्रमिकों की अवहेलना और उनके अधिकारों से वंचित रखना बर्दाश्त नहीं करेगा. इस सभा में स्थानीय श्रमिक नेता सुरेश मांझी, शंभूनाथ मिस्त्री, सलीम उरांव सहित सैकड़ों श्रमिक नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे.
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