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आंखों में आंसू लिए अस्पताल से लौट रहे मरीज

Updated at : 16 Jun 2019 2:16 AM (IST)
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आंखों में आंसू लिए अस्पताल से लौट रहे मरीज

डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी अस्तपाल में भर्ती मरीजों की संख्या 1200 से घटकर 800 हुई सिलीगुड़ी : एनआरएस कांड के खिलाफ शनिवार को भी उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का इमरजेंसी विभाग बंद रहा. गत बुधवार से ही राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेज के साथ उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर […]

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डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी

अस्तपाल में भर्ती मरीजों की संख्या 1200 से घटकर 800 हुई
सिलीगुड़ी : एनआरएस कांड के खिलाफ शनिवार को भी उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का इमरजेंसी विभाग बंद रहा. गत बुधवार से ही राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेज के साथ उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर आंदोलन पर हैं. शनिवार को इमरजेंसी विभाग का गेट बंद कर जूनियर डॉक्टरों के साथ इन्टर्न, हाउस स्टॉफ, पीजीटी डॉक्टरों के साथ सीनियर व विशेषज्ञ डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल हो गये.
शुक्रवार को कुल 119 डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था, जिसमें से कई डॉक्टरों ने शनिवार को वैकल्पिक इमरजेंसी यूनिट में रोगियों को परिसेवा दी. हांलाकि, वैकल्पिक इमरजेंसी यूनिट नाममात्र के लिए है. यहां सिर्फ अति गंभीर रोगियों का ही इलाज किया जा रहा है.
डॉक्टरों के आंदोलन के चलते मरीजों को आंखों में आंसू लिए वापस लौटना पड़ रहा है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पूरे उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज है. यहां सिलीगुड़ी के साथ-साथ उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाके, बिहार, असम के साथ पड़ोसी देश नेपाल, भूटान एवं बांग्लादेश के मरीज इलाज कराने आते हैं. यहां रोगियों की संख्या इतनी रहती है कि मेडिकल कॉलेज परिसर में मरीजों के परिजनों का तांता लगा रहता है. कॉरीडोर में पैर रखने की जगह नहीं रहती है. प्रतीक्षालयों में मवेशियों की तरह परिजन रात गुजारते हैं. कभी-कभार नौबत ऐसी आ जाती है कि एक बेड पर दो रोगियों रखना पड़ता है. फिर भी जगह कम पड़ जाती है तो मरीजों को फर्श पर लेटाकर इलाज करना पड़ता है.
लेकिन डॉक्टरों के आंदोलन की वजह से उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के 26 वार्ड वीरान-से पड़े हैं. यहां रोजाना 150 रोगियों को इमरजेंसी में भर्ती लिया जाता था. फिलहाल अधिकतम 50 मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है. 598 बेड वाले उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में अमूमन 1200 मरीज भर्ती रहते हैं, जबकि आंदोलन के चलते मरीजों की संख्या घटकर 800 पर पहुंच गयी है. शुक्रवार से शनिवार के बीच कुल सात रोगियों की मौत हो गयी.
मरीज विश्वजीत अधिकारी ने बताया किडॉक्टर राउंड पर आते ही नहीं है. न्यू जलपाईगुड़ी के साउथ कॉलोनी निवासी कमला सरकार इलाज के लिए बीते दो दिन से मेडिकल कॉलेज के पास किराये पर घर लेकर रह रही थी इस आस में कि आंदोलन समाप्त होने पर इलाज करायेगी. उसने कहा कि लगता है यह आंदोलन जल्द समाप्त नहीं होगा. कई मरीज तो नर्सिंगहोम एवं निजी अस्पताल चले गये. गत दो दिनों से नये मरीज को भर्ती नहीं लिया जा रहा है.
इस संबंध में उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. कौशिक ने कहा सीनियर व विशेषज्ञ डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं. जूनियर व पीजीटी डॉक्टरों के साथ इन्टर्न एवं स्टॉफ भी आंदोलन पर हैं. इस कारण ही मरीजों को लौटना पड़ रहा है. वैकल्पिक इमरजेंसी यूनिट में अत्यधिक गंभीर स्थिति नहीं होने पर मरीजों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है.
लेकिन लापरवाही का आरोप नहीं मिला है. इधर, आंदोलनकारियों की ओर से साग्निक मुखर्जी ने बताया कि सभी को समस्या हो रही है. लेकिन सरकार समाधान की ओर नहीं बढ़ रही है. हम भी काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन सरकार के रवैये को देखते हुए रविवार को भी आंदोलनजारी रहेगा.
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