प्रशासनिक अभियान रहा विफल

Published at :04 Jul 2014 7:21 AM (IST)
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प्रशासनिक अभियान रहा विफल

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मामला सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी तथा आसपास के इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ शुरू हुआ अभियान कुछ दिनों बाद ही टाय-टाय फिस्स हो गया है. पिछले दिनों माटागाड़ा थाना अंतर्गत कावाखाली में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के दो […]

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सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मामला

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी तथा आसपास के इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ शुरू हुआ अभियान कुछ दिनों बाद ही टाय-टाय फिस्स हो गया है. पिछले दिनों माटागाड़ा थाना अंतर्गत कावाखाली में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच हुए संघर्ष के बाद स्वयं उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था.

उन्होंने तब जलपाईगुड़ी तथा दाजिर्लिंग के जिलाधिकारी, एसपी, बीडीओ, भूमि तथा भूराजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की थी. मंत्री के इस बैठक के बाद सिलीगुड़ी के जमीन दलालों एवं भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया था. प्रशासन ने अपने स्तर पर कावाखाली तथा फुलबाड़ी इलाके में माइकिंग भी करायी. लोगों को 72 घंटे के अंदर सरकारी जमीन छोड़ देने का निर्देश दिया था. इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर भी लोगों को सचेत किया गया.

लेकिन तब से लेकर अब तक करीब 15 दिन से भी अधिक का समय बीत चुका है, प्रशासन को एक इंच जमीन भी खाली कराने में सफलता नहीं मिली. उल्टे सरकारी जमीन की अवैध रूप से खरीद-बिक्री का सिलसिला जारी है. इसके अतिरिक्त अवैध निर्माण भी तेज हो गये हैं. माइकिंग कराने एवं अखबारों में विज्ञापन जारी कर प्रशासन ने एक तरह से अपने कर्त्तव्य को पूरा कर लिया है. इस सिलसिले में ना तो किसी को नोटिस दी गई और ना ही पुलिस के माध्यम से जमीन को खाली करने के लिए कहा गया.

जिला प्रशासन की इस नरमी के कारण दलालों की चांदी हो गई है. दलाल अब लोगों को यह समझाने में लग गये हैं कि जमीन सरकारी नहीं है और उस पर अवैध रूप से कब्जा नहीं हुआ है. जमीन दलाल लोगों को यह कह कर भी बरगला रहे हैं कि यदि जमीन की बिक्री अवैध रूप से हुई होती, तो सरकार ने इसको खाली करवा लिया होता. इससे साधारण लोग बहकावें आ रहे हैं. जमीन की खरीद-बिक्री पहले की तरह ही जारी है.

इसके अलावा सरकारी जमीन पर बस्ती बनाकर रहने वाले लोगों एवं दलालों में भी इन दिनों तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की होड़ लग गई है. लोगों को लगता है कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से उन्हें नहीं हटाया जायेगा. इससे पहले यही लोग माकपा के समर्थक थे. तब स्थानीय माकपा नेताओं ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर इन लोगों को बसाया था. अब यही लोग सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस का झंडा थामकर अवैध कब्जे की जमीन को बचाने की जुगाड़ में लग गये हैं.

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