हिली के ऐतिहासिक पुल के संरक्षण की उठी मांग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Feb 2019 1:46 AM (IST)
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ब्रिटिशराज में पूर्वोत्तर भारत जाने के रूट पर था हिली शहर बालुरघाट : हिली की यमुना नदी पर बना ऐतिहासिक पुल आज जर्जर हो चुका है. अब यह पुल पैदल, साइकिल, रिक्शा आदि के ही चलने लायक बचा है. इसके बगल में हाइवे पर बने बड़े पुल से ज्यादातर आवागमन होता है. लेकिन इसके बावजूद […]
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ब्रिटिशराज में पूर्वोत्तर भारत जाने के रूट पर था हिली शहर
बालुरघाट : हिली की यमुना नदी पर बना ऐतिहासिक पुल आज जर्जर हो चुका है. अब यह पुल पैदल, साइकिल, रिक्शा आदि के ही चलने लायक बचा है. इसके बगल में हाइवे पर बने बड़े पुल से ज्यादातर आवागमन होता है. लेकिन इसके बावजूद लोग चाहते हैं कि पुराने पुल को सहेजकर रखा जाये, क्योंकि उसका ऐतहासिक महत्व है.
इस पुल को कभी स्वतंत्रता सेनानी सरोज रंजन चटर्जी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उड़ाने की योजना बनायी थी, जिससे ब्रिटिश फौजों की आवाजाही को रोका जा सके. हालांकि ऐसा नहीं हो सका, पर इसके चलते जिलावासी इस पुल से भावनात्मक रूप से जुड़े है. 512 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए इस पुल को हटाये जाने का अंदेशा इलाके के लोगों को है. स्थानीय इतिहासकारों व आग लोगों ने लगभग 200 मीटर लंबे और चार फुट चौड़े इस पुल के संरक्षण की मांग की है.
आजादी की लड़ाई में सशस्त्र क्रांति के अगुवा नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजी सेना के आवाजाही को बाधित करने के लिए इस पुल को बम से उड़ाने की योजना ली थी. उस समय हिली शहर और बालुरघाट सबडिवीजन था. इस क्षेत्र की ट्रेनें हिली से होकर गुजरती थीं. कोलकाता से शुरू होकर पूरे उत्तर-पूर्व भारत के साथ रेल यातायात हिली के रास्ते होता था. प्रशासनिक सुविधा के लिए हिली-बालुरघाट के बीच सड़क मार्ग को भी व्यवस्थित किया गया था. यह उत्तर बंगाल का प्राचीनतम बस रूट है. बांग्ला एकांकी नाटक के जनक मन्मथ राय द्वारा इस रूट पर चलायी जानेवाली पहली बस का नाम था आत्रेयी.
भारत तथा जिले के स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास में हिली के यमुना सेतु का महत्वपूर्ण स्थान है. जिले के इतिहासकार तथा विशिष्ट शिक्षक कौशिक विश्वास ने बताया कि इस पुल की उचित देखरेख होनी चाहिए. यह देश की स्वतंत्रता संग्राम में जिले की भूमिका का प्रमाण है. जिला शासक दीपाप प्रिया पी ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन 512 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए इस पुल को तोड़े जाने की खबर सच्ची नहीं है.
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