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सिलीगुड़ी : हर दिन 303 टन कचरा, आखिर कैसे हो निपटान

सिलीगुड़ी : शहर सिलीगुड़ी दिन प्रतिदिन तरक्की के पथ पर अग्रसर है. इसी के साथ यहां की जनसंख्या भी तेजी के से बढ़ रही है. बढ़ती जनसंख्या के साथ ही वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है. पूरा शहर एक तरह से जाम के शिकंजे में है. जाम की समस्या ने काफी परेशानी खड़ी कर […]

सिलीगुड़ी : शहर सिलीगुड़ी दिन प्रतिदिन तरक्की के पथ पर अग्रसर है. इसी के साथ यहां की जनसंख्या भी तेजी के से बढ़ रही है. बढ़ती जनसंख्या के साथ ही वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है. पूरा शहर एक तरह से जाम के शिकंजे में है. जाम की समस्या ने काफी परेशानी खड़ी कर दी है.
यह समस्या तो है ही,लेकिन आने वाले दिनों में शहर में एक और बड़ी समस्या आने वाली है. वह है कचरा निपटान का. मिली जानकारी के अनुसार हर रोज सिलीगुड़ी शहर से 303 टन कचरा निकलता है.जिसके निपटारे के लिए कोई कारगर वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं है.
फिलहाल सिलीगुड़ी के कचरे को इस्टर्न बाइपास स्थित डंपिंग ग्राउंड में फेंका जाता है. जिस वजह से वहां कचरों का अंबार है. कचरे की दुर्गंध से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी समस्या होती है. इस विकराल समस्या को देखकर पिछले दिनों में सिलीगुड़ी नगर निगम ने फूलबाड़ी के पुटीमारी इलाके में कचरा फेकने के लिए एक खाली स्थान चिन्हित किया गया था.
लेकिन किसी कारण से नगर निगम को उस योजना पर विराम लगानी पड़ी है. शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर से समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. निगम में वर्तमान 120 स्थाई सफाई कर्मियों के पद खाली हैं. डेली लेवर तथा मेनडेज कर्मियों को लेकर नगर निगम को काम चलाना पड़ रहा है.
अगर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में यह समस्या एक विकराल रुप धारण कर लेगी.इस समस्या पर सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य का कहना है कि नगर निगम में स्थाई सफाई कर्मियों की संख्या कम है. अभी भी नगर निगम में 120 सफाई कर्मियों के पद खाली हैं.
इसके अलावे शहर में वैज्ञानिक पद्धति से कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहां कि राज्य सरकार की ओर से सभी नगर पालिकाओं को यह सुविधा मुहैया करा दी गयी है. लेकिन सिलीगुड़ी इस सुविधा से वंचित है. मेयर कहा कि हर दिन सिलीगुड़ी से 303 टन कचरा निकलता है. जिसमें घरों से निकलने वाला कचरा सबसे अधिक है.
मेयर ने बताया कि कोलकाता का के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर होने के बाद भी यहां ड्रेनेज सिस्टम काफी खराब है. शहर के मुख्य रास्ते हिलकार्ट रोड, सेवक रोड, एसएफ रोड, विधान रोड, वर्धमान रोड राज्य सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के नियंत्रण में है. वहीं महानंदा नदी एसजेडीए के नियंत्रण में होने के बाद भी अभी तक महानंदा एक्शन प्लान का काम पूरा नहीं हुआ.
उन्होंने बताया कि शहर में फ्लाई ओवर से लेकर, अंडर पस, हाईड्रेन व अन्य विकास कार्य वाम सरकार के शासन में हुआ है. वर्तमान राज्य सरकार द्वारा सिलीगुड़ी के विकास में रोड़े अटका रही है. उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की भी कई योजनाएं है. देश के प्रत्येक राज्य के अलावे प्रत्येक नगर निगम तथा नगरपालिका को यह सुविधा मुहैया कराई जाती है. लेकिन सिलीगुड़ी अभी तक वंचित है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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