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राज्यपाल से पहाड़ में लोकतंत्र की रक्षा की फरियाद, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पुलिस आतंक का आरोप

Updated at : 22 Nov 2018 1:05 AM (IST)
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राज्यपाल से पहाड़ में लोकतंत्र की रक्षा की फरियाद, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पुलिस आतंक का आरोप

दार्जिलिंग : बुधवार को कई राजनैतिक दलों और संगठन-संस्थाओं ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. इसी दौरान अखिल भारतीय गोर्खा लीग का एक प्रतिनिधिदल भी राज्यपाल से मिला. गोर्खा लीग अध्यक्ष एसके प्रधान के नेतृत्व में महासचिव प्रताप खाती, उपाध्यक्ष मीना सुब्बा आदि ने करीब 20 मिनट तक राज्यपाल से बातचीत […]

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दार्जिलिंग : बुधवार को कई राजनैतिक दलों और संगठन-संस्थाओं ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. इसी दौरान अखिल भारतीय गोर्खा लीग का एक प्रतिनिधिदल भी राज्यपाल से मिला. गोर्खा लीग अध्यक्ष एसके प्रधान के नेतृत्व में महासचिव प्रताप खाती, उपाध्यक्ष मीना सुब्बा आदि ने करीब 20 मिनट तक राज्यपाल से बातचीत कर उन्हें पहाड़ की स्थिति से अवगत कराया.
इस मुलाकात के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए प्रताप खाती ने कहा कि पहाड़ में लोकतंत्र नहीं रह गया है. लोग पुलिस के आतंक के साये में जी रहे हैं. इन सारी बातों को हमलोगों ने राज्यपाल को बताया है. साथ ही एक ज्ञापन पत्र के माध्यम से लिखित रूप में भी दिया है.
उन्होंने कहा कि राज्यपाल को बताया गया कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड समर्पित राजनैतिक दलों और संगठन- संस्थाओं को जनसभा या रैली करने के लिए अनुमति नहीं दी जाती है. जबकि, गोरखालैंड विरोधियों को बड़े आराम से जनसभा, रैली आदि करने लिए अनुमति दी जा रही है. इतना ही नहीं, गोरखालैंड के पक्ष में बोलनेवालों को पुलिस झूठे आरोपों में जेल में डाल रही है. इस कारण पहाड़ में पुलिस का आतंक है.
इसी तरह फेडरेशन आफ इंडियन गोरखा एसोसिएशन (फिगो) की टोली ने भी राज्यपाल के साथ भेंट की. फिगो की 18 सदस्यीय प्रतिनिधि टोली राज्यपाल से मिलने के के बाद दार्जिलिंग प्रेस गिल्ड में पत्रकारों से रूबरू हुई. फिगो की वरिष्ठ सदस्य अंजली शर्मा ने बताया कि करीब एक घंटे तक हमारी राज्यपाल से बात हुई.
पहाड़ पर लोकतंत्र खत्म होने की बात बतायी गयी. उन्हें बताया गया कि जिस तरह 2017 में आन्दोलन के दौरान पहाड़ में मानवाधिकार का हनन हुआ था, उसी तरह आज भी चल रहा है. गोरखालैंड समर्थकों को पुलिस झूठे मामलों में फंसाकर जेल में ठूंस रही है. लोग डर के मारे घर-परिवार छोड़कर भागे हुए हैं. कुर्की के नाम पर वृद्ध और बच्चों तक को बेघर किया जा रहा है. कुर्की में बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म तक पुलिस ले गयी है.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोरखालैंड की मांग को राज्य से नहीं, बल्कि केंद्र से संबंधित बताती हैं. इसलिए राज्यपाल से गोरखालैंड की मांग को केन्द्र के समक्ष रख देने की अपील भी की गयी.
गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी राज्यपाल से मुलाकात की. संगठन की ओर से राज्यपाल को बताया गया कि कभी भी दार्जिलिंग बंगाल का भू-भाग नहीं था. इसके सिक्किम का होने का दावा करते हुए ज्ञापन पत्र सौंपा गया. यह जानकारी गोरांक के वरिष्ठ नेता सुबोध पाखरिंग ने दी.
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