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बेटी के लिए तेंदुए से भिड़ गया एक पिता, बेटी की बचार्इ जान

Updated at : 15 Oct 2018 2:29 AM (IST)
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बेटी के लिए तेंदुए से भिड़ गया एक पिता, बेटी की बचार्इ जान

वीरपाड़ा : तेंदुआ का नाम सुनते ही हमारे जेहन में किसी शेर या चीते से कम की तस्वीर नहीं बनती है. फिर अगर वह किसी को गले से दबोच ले तो उसका तो आमतौर पर बचना ही मुश्किल होता है. लेकिन एक बहादुर पिता ने काल के इस नियम को भी चुनौती देकर अपनी चार […]

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वीरपाड़ा : तेंदुआ का नाम सुनते ही हमारे जेहन में किसी शेर या चीते से कम की तस्वीर नहीं बनती है. फिर अगर वह किसी को गले से दबोच ले तो उसका तो आमतौर पर बचना ही मुश्किल होता है. लेकिन एक बहादुर पिता ने काल के इस नियम को भी चुनौती देकर अपनी चार साल की बेटी को तेंदुए के जबड़ों से बचा लिया.
हालांकि इसके लिये उसे अपनी जान को हथेली पर लेकर खूंख्वार जानवर से दो दो हाथ करना पड़ा. आखिर में प्रत्याक्रमण के सामने हथियार डालते हुए तेंदुआ बच्ची को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया. यह साहसिक कारनामा अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट-वीरपाड़ा ब्लॉक अंतर्गत धुमसीपाड़ा चाय बागान में हुआ है. शनिवार की शाम को यह वाकया धुमसीपाड़ा चाय बागान के निवासी शंकर छेत्री और उनकी बेटी आकृति छेत्री के साथ हुआ है.
जानकारी अनुसार बीते कल की शाम आकृति पड़ोस के घर से आ रही थी. उसी समय जंगल से निकल आये एक तेंदुए ने बच्ची के जबड़े को पकड़ लिया और वह चाय बागान की ओर भागने लगा. बेटी के चिल्लाने की आवाज सुनते ही बगल में ही काम कर रहे आकृति के पिता शंकर छेत्री ने आव देखा न ताव. वह तुरंत तेंदुए का पीछा करते हुए बागान में पहुंचे. उसके बाद तो उन्होंने हाथ में जो कुछ मिला उसी से तेंदुए पर प्रहार करने लगे. पत्थर और लाठियों के इस अप्रत्याशित हमले के आगे तेंदुआ घबरा गया और वह आकृति को छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया.
इधर, शंकर छेत्री ने खून से लथपथ अपनी बेटी को पड़ोसियों की मदद से तत्काल ही उत्तरबंगाल मेडिकल कॉलेज-अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल आकृति का वहीं पर इलाज चल रहा है. धुमसीपाड़ा चाय बागान के निवासियों का कहना है कि यहां अक्सर तेंदुए आ जाते हैं. हालांकि वन विभाग को सूचित करने के बावजूद वे नहीं पहुंचते हैं. हमें दिन रात खतरों के बीच रहना पड़ता है.
इस बारे में वन विभाग के मदारीहाट रेंज के रेंजर खगेश्वर कार्जी ने बताया कि बच्ची का इलाज वन विभाग अपने खर्च पर करायेगा. वहीं, तेंदुए को पकड़ने के लिये धुमसीपाड़ा चाय बागान में पिंजरा लगाया जायेगा.
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