सिलीगुड़ी डीआइ का वेतन भी कर दिया गया बंद

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jun 2018 1:33 AM

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सिलीगुड़ी : बिना किसी घोषित कारण के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआई) की पहले गाड़ी और अब मासिक वेतन बंद कर दिया गया है. कारण के संबंध में कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं. सभी का कहना है कि जिला अधिकारी (डीएम) के निर्देशानुसार यह कार्रवाई हुई है. हालांकि इस मामले में अटकलें शुरू हो गयी […]

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सिलीगुड़ी : बिना किसी घोषित कारण के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआई) की पहले गाड़ी और अब मासिक वेतन बंद कर दिया गया है. कारण के संबंध में कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं. सभी का कहना है कि जिला अधिकारी (डीएम) के निर्देशानुसार यह कार्रवाई हुई है. हालांकि इस मामले में अटकलें शुरू हो गयी हैं. माना जा रहा है कि किसी घपले-घोटाले के चलते डीएम ने इस तरह का कदम उठाया है. इसे लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय प्राथमिक व माध्यमिक में खलबली मची हुई है.
सिलीगुड़ी शिक्षा जिला विद्यालय निरीक्षक (प्राथमिक) के पद पर तपन कुमार बसु हैं. माध्यमिक के डीआई का अतिरिक्त पदभार भी उनके ही कंधों पर है. दोनों कार्यालय के डीआई के लिए दो गाड़ियां थीं. लेकिन अचानक दोनों गाड़िया गायब हो गयीं. सूत्रों के अनुसार, दोनों गाड़ियां किसी एजेंसी से किराये पर ली गयी थीं. मई व जून महीने के बिल का भुगतान नहीं किये जाने पर एजेंसी ने गाड़ी वापस ले ली. इधर डीआई का जून महीने का मासिक वेतन भी रोक दिया गया है. सिर्फ डीआई नहीं, बल्कि प्राथमिक काउंसिल के एआई सहित अन्य 6 अधिकारियों का वेतन भी रोक दिया गया है.
डीआई तपन कुमार बसु भले ही माध्यमिक का अतिरिक्त पदभार संभाल रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन प्राथमिक काउंसिल का ही मिलता है. उनके साथ-साथ एआई शुक्ला बसाक व समर मंडल तथा चार क्लर्क की तनख्वाह बंद कर दी गयी है. डीआई तपन कुमार बसु ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कुछ भी पता नहीं है. उन्हें बस इतना मालूम है कि पहले गाड़ी बंद कर दी गयी और उन्हें अभी इस महीने का वेतन नहीं मिला है. गाड़ी व वेतन बंद करने के पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस तक नहीं दिया गया है.
यहां बता दें कि डीआई प्राथमिक व माध्यमिक की गाड़ी सर्व शिक्षा मिशन की ओर से मुहैया करायी जाती है. गाड़ी बंद करने को लेकर सर्व शिक्षा मिशन के डीपीओ अनाबिल दत्ता ने बताया कि सब कुछ जिला अधिकारी के निर्देश पर किया गया है. इससे ज्यादा उन्हें भी कुछ मालूम नहीं है. कारण जानने के लिए दार्जिलिंग की जिला अधिकारी जयसी दासगुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डीआई तपन कुमार व प्राथमिक काउंसिल के अधिकारियों की गतिविधियों से सर्व शिक्षा मिशन के डीपीओ व जिला अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं. सूत्रों की मानें तो नरसुंदर हाइस्कूल में निर्माण कार्य, स्कूल ड्रेस आदि को लेकर करोड़ों का घोटाला हुआ है. एक ही कार्य के लिए कई बार सर्व शिक्षा मिशन से स्कूल को आर्थिक आवंटन किया गया. इसके अतिरिक्त अन्य परियोजना का आवंटन भी किसी अन्य मद में खर्च कर दिया गया. इन मामलों को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है. इनमे से किसी एक मामले की जांच बीते जनवरी महीने में डीआई तपन कुमार बसु को भी सौंपी गयी थी. हालांकि अभी तक यह सारा मामला फाइलों में ही कैद है.
सूत्रों के मुताबिक, गाड़ी व वेतन बंद करने का कोई लिखित निर्देश डीएम ने जारी नहीं किया है. उनके मौखिक निर्देश पर ही सर्व शिक्षा मिशन ने डीआई की गाड़ी व ट्रेजरी ने डीआई के साथ 6 अधिकारियों का वेतन रोक दिया है. शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वेतन रोकने का अधिकार डीएम को नहीं है. डीआई का वेतन रोकने के लिए शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव का ऑर्डर होना आवश्यक है. किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का वेतन बंद करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी करना आवश्यक है. बिना किसी नोटिस के वेतन बंद करना मानवाधिकार का उल्लंघन है.
कबाड़ में किताबों की बिक्री से भी डीएम नाराज
हाल ही में सरकारी किताबें कबाड़ में बेचने का मामला प्रभात खबर ने उजागर किया था. बीते मई महीने में सिलीगुड़ी नगर निगम के 1 नंबर वार्ड स्थित डॉ भीमराव आम्बेडकर हिंदी प्राइमरी स्कूल के प्रभारी शिक्षक मुन्ना शर्मा ने डेढ़ क्विंटल सरकारी किताबें बिना किसी अनुमति के कबाड़ में बेच दी थीं. मामला सामने आते ही डीआई तपन कुमार बसु ने एक जांच टीम गठित की. लेकिन घटना के करीब दो महीने बाद भी कमिटी ने जांच की रिपोर्ट डीआई को नहीं सौंपी है.
प्राथमिक काउंसिल के एसआई आहास उल करीम के नेतृत्व में जांच कमिटी विद्यालय गयी थी और प्रभारी शिक्षक मुन्ना शर्मा से वर्ष 2012 से लेकर अब तक के किताबों का आवंटन व वितरण का ब्योरा मांगा था. बिना टेंडर किताबें कबाड़ में बेचने का मामला भी डीएम के कानों तक पहुंचा है. इसके अलावा भी कई शिकायतें उन्हें मिली हैं.
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