तृणमूल की ‘शहीद दिवस’ रैली आज, विस चुनाव से पूर्व ममता कर सकती हैं बड़ा एलान

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तृणमूल की ‘शहीद दिवस’ रैली आज, विस चुनाव से पूर्व ममता कर सकती हैं बड़ा एलान

राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. हालांकि, इसके एक साल पहले से ही विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी तैयारी शुरू कर दी है.

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सभा की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री ने लिया मंच का जायजा

संवाददाता, कोलकाता

राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. हालांकि, इसके एक साल पहले से ही विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में सोमवार को तृणमूल की शहीद दिवस रैली काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यहां विक्टोरिया हाउस के पास होने वाली इस सभा के दौरान मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ही मुख्य वक्ता रहेंगी और वह महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकती हैं. उनके चुनाव का बिगुल फूंकने के साथ ही महत्वपूर्ण सांगठनिक रणनीति का एलान करने की भी संभावना है.

बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर भाजपा को घेर रहीं तृणमूल प्रमुख

तृणमूल कांग्रेस पहले ही भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों के उत्पीड़न के मुद्दे पर विरोध जता रही है. सुश्री बनर्जी ने बंगाली अस्मिता को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. उनका आरोप है कि भाजपा बांग्ला भाषियों को निशाना बना रही है और उन्हें बांग्लादेशी करार दिया जा रहा है. सोमवार की ‘शहीद दिवस’ सभा से सुश्री बनर्जी के एक बार फिर से भाजपा नीत केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साध सकती हैं. भाषण के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा बंगालियों के उत्पीड़न, राज्य के प्रति केंद्र की कथित ‘उपेक्षा’, और केंद्र सरकार द्वारा ‘राज्य का बकाया फंड’ नहीं देने जैसे मुद्दों को उठाये जाने संभावना है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस बार तृणमूल अपनी चुनावी रणनीति को ””बंगाली अस्मिता”” के इर्द-गिर्द केंद्रित कर सकती है.

तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली हर साल 21 जुलाई को मनायी जाती है, जो 1993 में हुए उस आंदोलन की याद दिलाती है, जब ममता बनर्जी युवा कांग्रेस नेता के रूप में मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य करने की मांग को लेकर राइटर्स बिल्डिंग की ओर मार्च कर रही थीं. पुलिस की फायरिंग में उस दिन 13 कार्यकर्ताओं की जान चली गयी थी. इस घटना ने ममता बनर्जी की राजनीतिक सोच और करियर को पूरी तरह बदल दिया. वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद यह दिन पार्टी के लिए शहीद दिवस बन गया.

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Akhilesh Kumar Singh

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