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दो दिनों में छोड़ा गया 57 हजार क्यूसेक पानी, तटवर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा

Updated at : 18 Jul 2025 1:26 AM (IST)
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दो दिनों में छोड़ा गया 57 हजार क्यूसेक पानी, तटवर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) द्वारा और पानी छोड़े जाने से कई जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.

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सतर्कता. डीवीसी के पानी छोड़ने से तटवर्ती जिलों को राज्य सरकार ने किया अलर्ट

संवाददाता, कोलकातादामोदर घाटी निगम (डीवीसी) द्वारा और पानी छोड़े जाने से कई जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. बुधवार के बाद गुरुवार सुबह से पंचेत और मैथन जलाशयों से लगभग 57 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इसमें से लगभग 38 हजार क्यूसेक पानी पंचेत से और 18 हजार क्यूसेक पानी मैथन से छोड़ा गया. इसके परिणामस्वरूप दामोदर नदी के किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. यह भारी मात्रा में पानी पश्चिम बर्दवान के दुर्गापुर बैराज से होते हुए हावड़ा, हुगली और पूर्व बर्दवान की ओर बह रहा है. साथ ही पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश भी जारी है. नतीजतन इन जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. डीवीसी द्वारा पानी छोड़े जाने के कारण हुगली के खानकुल, आरामबाग, हावड़ा के अमता, उदयनारायणपुर जैसे इलाके पहले से ही बाढ़ की चपेट में हैं. बांकुड़ा और पश्चिम बर्दवान में भी खतरा मंडरा रहा है. पानी छोड़े जाने के कारण आरामबाग के खानाकुल के कई इलाकों में बाढ़ आ गयी है. खानाकुल दो नंबर पंचायत समिति के सुंदरपुर इलाके में कई घर ढह गये हैं. कुछ घरों में बड़ी दरारें पड़ गयी हैं. कुछ लोग फिर से पानी में से होते हुए काफी दूर तक पैदल चल कर भाजपा पंचायत समिति अध्यक्ष रुंपा मंडल के पास पहुंचे. रुंपा ने जल्द ही स्थिति का समाधान करने का आश्वासन दिया है. आरामबाग के पांडुग्राम में भी यही नजारा देखने को मिल रहा है. हरिपाल ब्लॉक के एक बड़े इलाके में कृषि भूमि जलमग्न हो गयी है. अमन धान के मौसम में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बीघा-बीघा जमीन पानी में डूब गयी है. हर साल बारिश और डीवीसी के पानी के कारण डाकतिया नहर ओवरफ्लो हो जाती है और हुगली नदी का एक बड़ा इलाका जलमग्न हो जाता है. डीवीसी ने गुरुवार को पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ा दी है. दो जलाशयों मैथन और पंचेत से पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है. बुधवार को 48 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. हालांकि, गुरुवार को छोड़े गये पानी की मात्रा बढ़कर लगभग 57 हजार क्यूसेक हो गयी. गुरुवार सुबह छह बजे से मैथन से 38 हजार और पंचेत से लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है. इसे देखते हुए गुरुवार को भी नदी तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है. नबान्न की ओर से इसे लेकर जिलों को सतर्क कर दिया गया है. जिलाधिकारियों को सभी तरह के कदम उठाने के निर्देश दिये हैं. मंगलवार को ही नबान्न की ओर से अतिरिक्त पानी छोड़ने को लेकर पत्र भेजा गया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कई बार डीवीसी पर निशाना साध चुकी है. हालांकि डीवीसी ने जानकारी दी है कि झारखंड के हजारीबाग, धनबाद, बोकारो समेत दामोदर नदी के ऊपरी बेसिन में बारिश की मात्रा बढ़ गयी है. नतीजतन, जलाशय में पानी का दबाव भी बढ़ गया है. इसीलिए पानी छोड़ने का यह फैसला लिया गया है. डीवीसी के एक अधिकारी ने कहा कि वे उतना ही पानी छोड़ रहे हैं, जितना उन्हें छोड़ने का आदेश मिलता है. यह आदेश देने वाली समिति में पश्चिम बंगाल सरकार, झारखंड सरकार और डीवीसी अधिकारियों के साथ-साथ केंद्रीय जल आयोग के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं. यह समिति जलाशय में पानी की मात्रा और वर्षा की मात्रा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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