विस चुनाव से पहले अप्रैल में हो सकता है राज्यसभा चुनाव

Published by : SANDIP TIWARI Updated At : 08 Feb 2026 11:23 PM

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अप्रैल 2026 में राज्यसभा की कुल 37 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें बंगाल की पांच सीटें शामिल हैं

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अप्रैल 2026 में राज्यसभा की कुल 37 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें बंगाल की पांच सीटें शामिल हैं कोलकाता.पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के बीच राज्यसभा चुनाव भी होने की संभावना है. राज्य में अगले कुछ दिनों के अंदर ही विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है, लेकिन इसी बीच माना जा रहा है कि अप्रैल में राज्यसभा चुनाव भी हो सकते हैं. अप्रैल 2026 में राज्यसभा की कुल 37 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें बंगाल की पांच सीटें शामिल हैं. इन सीटों पर चुनाव बंगाल विधानसभा के विधायकों के मतदान से होगा. जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी, साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी शामिल हैं. इसके अलावा माकपा नेता, वरिष्ठ अधिवक्ता और कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य का कार्यकाल भी इसी अवधि में खत्म हो रहा है. वहीं, मौसम बेनजीर नूर के इस्तीफे के बाद एक सीट पहले से ही रिक्त है. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इन पांच सीटों में से चार पर तृणमूल और एक पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने अपने विधायकों को सूचित कर दिया है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही उनसे संपर्क किया जायेगा. राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक प्रत्याशी के लिए 10 प्रस्तावक और 10 समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. त्रुटिरहित नामांकन सुनिश्चित करने के लिए दल एक प्रत्याशी के लिए कई नामांकन पत्र दाखिल करते हैं. सूत्रों के अनुसार, तृणमूल अपने चार प्रत्याशियों के लिए 200 से अधिक विधायकों को नामांकन प्रक्रिया में शामिल कर सकती है, जबकि भाजपा भी अपने 65 विधायकों के जरिये एक सीट के लिए कई नामांकन दाखिल करने की रणनीति पर काम कर रही है. विधानसभा सचिवालय का मानना है कि अधिसूचना जारी होते ही प्रक्रिया तेज हो जायेगी और चूंकि संख्या बल स्पष्ट है, इसलिए इस चुनाव में मतदान की नौबत नहीं आयेगी. स्क्रूटनी के बाद प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये जाने की पूरी संभावना है. सूत्रों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 50 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है. चूंकि विपक्षी खेमा भाजपा के पास पर्याप्त संख्या है, इसलिए इस बार मतदान की नौबत आने की संभावना बेहद कम है. माना जा रहा है कि नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रत्याशियों को जीत का प्रमाणपत्र सौंप दिया जायेगा.

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