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मंत्रालय बनने के बाद भी आयुष की अनदेखी कर रही केंद्र सरकार

Updated at : 08 Jun 2025 10:49 PM (IST)
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मंत्रालय बनने के बाद भी आयुष की अनदेखी कर रही केंद्र सरकार

नहीं मिला रहा फाइनेंस कमीशन से अतिरिक्त फंड

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नहीं मिला रहा फाइनेंस कमीशन से अतिरिक्त फंड – 2014 में आयुष मंत्रालय का हुआ है गठन – अतिरिक्त निधि ना मिलने से देशभर में आयुष का नहीं हो पा रहा समग्र विकास – पश्चिम बंगाल भी प्रभावित शिव कुमार राउत कोलकाता. मोदी सरकार की अगुवाई में देश में पहली बार 2014 में आयुष मंत्रालय का गठन किया गया, पर मंत्रालय के गठन के बावजूद कुछ आयुष चिकित्सक अभी भी मानते हैं कि आयुष को आवश्यक ध्यान और संसाधन नहीं मिल रहे हैं. मंत्रालय की संरचना और कामकाज में सुधार की आवश्यकता है. अब इसकी बानगी भी देखने को मिल रही है. “आयुष ” भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक संक्षिप्त रूप है. आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को आयुष चिकित्सा में शामिल किया गया है. देसी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोर दे रहे हैं. इसके बावजूद वित्त मंत्रालय के अधीन फाइनेंस कमीशन से आयुष को आर्थिक मदद नहीं मिल रही है. देश के विभिन्न आधारभूत ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त फंड आवंटित किये जाने के लिए फाइनेंस कमीशन का गठन किया गया है. देश में फिलहाल 15वां फाइसेंस कमीशन लागू है. हर पांच साल के अंतराल पर फाइनेंस कमेटी की रिपोर्ट पर विभिन्न मंत्रालयों को बजट के अलावा अतिरिक्त फंड आवंटित करने के लिए फाइनेंस कमीशन का गठन किया जाता है. 15 वां फाइनेंस कमीशन वित्त वर्ष 2021-22 में लागू हुआ है, जो 2026 तक चलेगा. वर्तमान में लागू फाइनेंस कमीशन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को 70,051 करोड़ धनराशि आवंटित की है. जो पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर खर्च किये जा रहे हैं, पर आयुष मंत्रालय को फाइनेंस कमीशन से अतिरिक्त फंड नहीं मिल रहा है. यह जानकारी खुद केंद्र सरकार की ओर से दी गयी है. पश्चिम बंगाल के एक आयुर्वेदिक चिकित्सक पब्लिक ग्रीवांस सेल, प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, स्वास्थ्य व आयुष मंत्रालय से इस संबंध में जानकारी मांगी थी. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि आयुष को फाइनेंस कमीशन से अतिरिक्त फंड नहीं मिल रहा है. आयुर्वेद व आयुष के विस्तार के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता : आयुर्वेद देश की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है. देश में समग्र आयुष के विस्तार केवल मंत्रालय को आवंटित बजट से संभव नहीं है. इसके लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है. विदित हो कि, केंद्रीय बजट 2025-26 में आयुष मंत्रालय के लिए लगभग 3,993 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव है. इसलिए आयुष चिकित्सक उक्त फंड की मांग कर रहे हैं. एक आयुर्वेद चिकित्सक ने बताया कि अगर आयुष मंत्रालय को भी फाइनेंस कमीशन से अतिरिक्त फंड मिले तो पूरे देश में आयुर्वेद सह अन्य चिकित्सा पद्धति का विस्तार होगा. उन्होंने बताया कि आज भी देश में ब्लॉक से प्राइमरी हेल्थ सेंटर और नगर निगम स्तर पर आयुष क्लीनिक, ओपीडी या इंडोर विभाग पूरी तरह के तैयार नहीं है. पश्चिम बंगाल में 90 फीसदी प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में आयुर्वेद क्लीनिक नहीं है. राज्य में 40 फीसदी ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर (बीपीएचसी) आयुर्वेद क्लिनिक नहीं है. वहीं 20 फीसदी आयुष बीपीएचसी में आयुष नहीं है. इसके अलावा राज्य में खोले गये 41 सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आयुष या आयुर्वेद क्लीनिक नहीं है. एक आयुर्वेद चिकित्सक ने बताया कि साल 1995 में केंद्र सरकार द्वारा आयुष विभाग का गठन किये गया था. 2014 में आयुष मंत्रालय बना. पर इसके बाद भी आज तक आयुष का जिस स्तर पर विस्तार होना चाहिए वह नहीं हुआ. बॉक्स में : 15 वें फाइनेंस कमीशन से पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग को पिछले पांच वर्षों में 4402 करोड़ प्राप्त हुए हैं. राज्य को वर्ष 2021-22 और 2022-23 में 829, 2023-24 में 870, 2024-25 में 914 और 2025-26 में 960 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड प्राप्त हुआ है. अगर आयुष मंत्रालय को अतिरिक्त फंड दिया गया होता तो इससे राज्य सरकार भी लाभान्वित होती. राज्य के आयुष चिकित्सा के क्षेत्र पर खर्च किये जाते, क्योंकि राज्य में आयुष का काफी बुरा हाल है. राज्य में आयुर्वेद और होम्योपैथी चलन में है, पर दोनों के विस्तार के लिए काफी संसाधन की जरूरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANDIP TIWARI

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SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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