जनसांख्यिकीय बदलाव से हिंदू बन सकते हैं कई जिलों में अल्पसंख्यक

Updated at : 23 Mar 2026 8:49 PM (IST)
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जनसांख्यिकीय बदलाव से हिंदू बन सकते हैं कई जिलों में अल्पसंख्यक

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक बन सकते हैं, जिससे भविष्य में हिंदू उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना बहुत कठिन हो जायेगा.

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कोलकाता.

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक बन सकते हैं, जिससे भविष्य में हिंदू उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना बहुत कठिन हो जायेगा. प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने में असफल रहने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. उन्होंने बताया कि पार्टी अब बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, बंगाल-केंद्रित मुद्दों को आगे बढ़ाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करने पर ध्यान दे रही है, जिससे चुनावी गणित बदल सकता है.

सुकांत मजूमदार ने 2026 के विधानसभा चुनावों को राज्य के लिए एक जनसांख्यिकीय निर्णायक मोड़ करार दिया. उन्होंने कहा कि जनगणना अभी नहीं हुई है, लेकिन ममता बनर्जी ने खुद कहा है कि मुस्लिम आबादी लगभग 33 प्रतिशत है, जो 33-35 प्रतिशत तक हो सकती है. अगले पांच वर्षों में यह और बढ़ेगी. इसके बाद हिंदुओं के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जायेगा. श्री मजूमदार ने यह भी दावा किया कि यदि तृणमूल सत्ता में बनी रहती है, तो 2026 का चुनाव ऐसा आखिरी चुनाव हो सकता है, जिसमें बंगाली हिंदू राज्य की चुनावी दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जनसांख्यिकी में बदलाव के कारण तृणमूल को धीरे-धीरे हिंदुओं के बजाय मुसलमानों को अधिक टिकट देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. मुस्लिम उपमुख्यमंत्री की मांग अभी से सुनाई दे रही है. ये मांगें भविष्य में पूरी होंगी और अंततः इससे मुस्लिम मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है. इतिहास का हवाला देते हुए, मजूमदार ने विभाजन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा और मुस्लिम लीग के सत्ता में रहने के दौरान हुए ‘ग्रेट कलकत्ता हत्याकांड’ का जिक्र किया. भाजपा लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या में बदलाव राज्य की राजनीति को प्रभावित कर रहा है और इसी मुद्दे को पार्टी 2026 चुनाव के लिए प्रचार अभियान का प्रमुख विषय बना रही है. मजूमदार ने कहा कि राज्य की लगभग एक-तिहाई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है, और यदि यह समुदाय एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ मतदान करता है तो यह भाजपा के लिए एक संरचनात्मक चुनौती बन सकता है .

उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ बंगाली हिंदुओं को बचाने का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल को पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनने से रोकने का है. केवल भाजपा ही बंगाल को बचा सकती है. श्री मजूमदार ने कहा कि पार्टी बंगाली हिंदू मतदाताओं के बीच एकजुटता और सत्तारूढ़ तृणमूल के प्रति बढ़ते मोहभंग पर भरोसा कर रही है.

भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा न करने पर उन्होंने कहा कि पार्टी टीम गेम में विश्वास करती है. उन्होंने दिल्ली और ओडिशा के उदाहरण दिये, जहां बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव जीते गये. शुभेंदु को भवानीपुर से उम्मीदवार बनाये जाने पर डॉ मजूमदार ने कहा कि हम ममता बनर्जी को सीधे हराना चाहते हैं.

केंद्रीय मंत्री का आरोप- बंगाल में पिछले 15 वर्षों में नहीं हुआ कोई बड़ा निवेश : भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बंगाल में पिछले 15 वर्षों में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ. गुजरात को भारत के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) का लगभग 17 प्रतिशत मिलता है, जबकि पश्चिम बंगाल को सिर्फ 0.66 प्रतिशत. राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर है और शिक्षा व्यवस्था गिर रही है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर तृणमूल के विरोध को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि कोई नुकसान नहीं हुआ है और भाजपा कार्यकर्ता पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने में मदद कर रहे हैं.

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