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फेफड़े की दुर्लभ बीमारी का एनआरएस में सफल इलाज

Updated at : 31 Oct 2025 1:34 AM (IST)
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फेफड़े की दुर्लभ बीमारी का एनआरएस में सफल इलाज

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पहली बार कोलकाता के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस (पीएपी) नामक फेफड़े की एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी का सफल उपचार किया गया है.

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डॉक्टर बता रहे ऐतिहासिक उपलब्धि

शिव कुमार राउत, कोलकाता

एनआरएस मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने चिकित्सा इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पहली बार कोलकाता के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस (पीएपी) नामक फेफड़े की एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी का सफल उपचार किया गया है.

लगातार सांस लेने में हो रही थी तकलीफ

33 वर्षीय पुरुष मरीज को लगातार सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. जांच में पीएपी- पॉजिटिव ब्रोंकोएल्वियोलर लैवेज (बीएएल) और ट्रांसब्रोंकियल लंग्स बायोप्सी (टीबीएलबी) रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि मरीज पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस से पीड़ित है. इस बीमारी में प्रोटीन जैसा पदार्थ फेफड़ों की वायु कोशिकाओं (एल्वियोली) में भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित हो जाता है और सांस लेने में गंभीर कठिनाई होती है.

इलाज की ऐतिहासिक प्रक्रिया

इस स्थिति के उपचार के लिए होल लंग लैवेज नामक एक जटिल प्रक्रिया की जाती है. यह अत्यधिक तकनीकी और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें पल्मोनोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के बीच सटीक समन्वय की आवश्यकता होती है. एनआरएस मेडिकल कॉलेज में यह प्रक्रिया प्रो डॉ जयदीप देब के नेतृत्व में पल्मोनोलॉजी विभाग और कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर एनेस्थीसिया ( सीटीवीए) विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक पूरी की.

चिकित्सकों ने मरीज के फेफड़े को धोया

डॉक्टरों ने डबल-लुमेन इंटुबेशन तकनीक का उपयोग किया, जिसमें एक विशेष ट्यूब श्वासनली में डाली जाती है, ताकि एक फेफड़ा काम करता रहे और मरीज को लगातार ऑक्सीजन मिलता रहे. इसके बाद दाहिने फेफड़े को 15 लीटर गर्म सलाइन से तब तक धोया गया, जब तक उसमें जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह साफ न हो गया. धुलाई के बाद फेफड़ा फिर से सामान्य रूप से कार्य करने लगा और मरीज की सांस लेने की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ. मरीज वर्तमान में स्थिर और स्वस्थ है. चूंकि दोनों फेफड़ों में संक्रमण पाया गया था, इसलिए अगले सप्ताह बायें फेफड़े की धुलाई की योजना बनायी गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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