आरजी कर भ्रष्टाचार मामला : अख्तर ने मांगी राहत, आरोप तय होने की प्रक्रिया टली

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आरजी कर भ्रष्टाचार मामला : अख्तर ने मांगी राहत, आरोप तय होने की प्रक्रिया टली

सीबीआइ ने इस अर्जी का विरोध किया. फिलहाल इस दिन आरोप तय नहीं हो सका.

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‘व्हिसल ब्लोअर’ के तौर पर अख्तर अली का नाम आया था सामने, बाद में उसके ही भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के लगे आरोप कोलकाता. आरजी कर मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में भ्रष्टाचार के मामले में बुधवार को आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. इस दिन अलीपुर अदालत स्थित स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में आरजी कर अस्पताल के पूर्व उप अधीक्षक अख्तर अली ने राहत की अपील करते हुए खुद को मामले से अलग करने का आवेदन दायर किया. सीबीआइ ने इस अर्जी का विरोध किया. फिलहाल इस दिन आरोप तय नहीं हो सका. दूसरी ओर से अली की जमानत का आवेदन भी खारिज कर दिया गया. मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी. बताया गया कि इस दिन स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी. इस मामले की सुनवाई शुरू से अलीपुर सीबीआइ कोर्ट नंबर-दो में चल रही थी, लेकिन संबंधित न्यायाधीश एसआइआर कार्य में नियुक्त हैं. ऐसे में सीबीआइ कोर्ट-एक के न्यायाधीश अतिरिक्त प्रभार में सुनवाई कर रहे थे. सुनवाई के दौरान अली के वकील ने अदालत से मामले से अपने मुवक्किल को अलग करने की अपील की. इसके खिलाफ सीबीआइ ने अर्जी दायर कर अपना पक्ष रखा. इस कारण आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. फिलहाल अली न्यायिक हिरासत में ही रहेगा. आरजी कर भ्रष्टाचार मामले में शुरुआत में अख्तर अली का नाम ‘ व्हिसिल ब्लोअर ’ के तौर पर सामने आया था. उसने कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठायी थी. बाद में कलकत्ता के निर्देश पर सीबीआइ और उसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने जांच शुरू की. व्हिसिल ब्लोअर वह व्यक्ति होता है, जो किसी संगठन, कंपनी या सरकारी संस्था के भीतर हो रहे भ्रष्टाचार, गैर-कानूनी गतिविधियों, धोखाधड़ी, या जनहित के खिलाफ गलत कामों को उजागर करता है. हालांकि, उक्त मामले में जांच आगे बढ़ने पर अली पर भी भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप लगे. कई बार समन के बावजूद अदालत में पेश न होने पर उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ. बाद में उसने अदालत में आत्मसमर्पण किया और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत की अर्जी लगायी, जिसे खारिज कर दिया गया. तब से वह न्यायिक हिरासत में है. मामले में अन्य आरोपी, जिनमें मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष भी शामिल है, फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

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Ganesh Mahto

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