पोस्टल कवर से दुनिया में पहुंचेगी मां बर्गभीमा की महिमा, 51 शक्तिपीठों में एक है यह मंदिर

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मां उग्रतारा की पूजा-अर्चना के बाद पोस्टल कवर जारी करते गणमान्य लोग.

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Postal Cover on Bargabhima Temple: पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के प्रसिद्ध बर्गभीमा मंदिर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए भारतीय डाक विभाग की ओर से पोस्टल कवर जारी किया गया है. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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Postal Cover on Bargabhima Temple: पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक शहर तमलूक की प्राचीन शक्तिपीठ मां बर्गभीमा की महिमा अब देश-विदेशों में गूंजेगी. डाक विभाग ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और विशेष पहल की है. भारतीय डाक विभाग ने बर्गभीमा मंदिर के नाम पर विशेष डाक आवरण (Postal Cover) जारी किया है. इस पहल को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

60 फुट ऊंचा है मंदिर

इतिहास में ताम्रलिप्त के नाम से प्रसिद्ध तमलूक सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. इस शहर में मौजूद इस मंदिर की स्थापत्य कला इसे भव्य स्वरूप देती है. लगभग 60 फुट ऊंचा यह प्राचीन देवालय ओड़िशा शैली की वास्तुकला में निर्मित है. मंदिर की बाहरी दीवारों पर टेराकोटा की अद्भुत नक्काशी इसकी ऐतिहासिक समृद्धि की गवाही देती है. प्रत्येक आकृति, शिल्पकला बीते युग की कहानी कहती है.

काले पत्थर से बनी है मां बर्गभीमा की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित मां बर्गभीमा की प्रतिमा है, उनकी पूजा उग्रतारा स्वरूप में की जाती है. इतिहास, पुराण और लोकविश्वास के अद्भुत संगम इस मंदिर को केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत केंद्र बनाता है. वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. पश्चिम बंगाल ही नहीं, देश के अन्य राज्यों और विदेशों से भी भक्त यहां आते हैं. नवरात्र और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है.

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आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष डाक आवरण मां उग्रतारा की आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास है. डाक आवरण किसी स्थान, विरासत, ऐतिहासिक धरोहर या विशेष सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का एक प्रतिष्ठित माध्यम माना जाता है. एक बार जारी होने के बाद यह संग्रहकर्ताओं, शोधकर्ताओं और आम लोगों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचता है. मां बर्गभीमा मंदिर के नाम पर जारी विशेष डाक आवरण तमलूक की पहचान को नयी ऊंचाई देगा.

मां उग्रतारा मंदिर में हुई विशेष पूजा

आवरण को जारी करने से पहले इन्हें मां बर्गभीमा के चरणों में अर्पित किया गया. विधिवत पूजा की गयी. धार्मिक अनुष्ठान के बाद इन्हें आधिकारिक रूप से जारी किया गया. यह दृश्य श्रद्धा और गौरव का अनोखा संगम था, जहां परंपरा और आधुनिक पहचान एक साथ दिखी.

ये लोग थे उपस्थित

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम में तमलूक के उपमंडल अधिकारी सौभिक मुखर्जी, पूर्व विधायक ब्रह्मामय नंदा, मंदिर के सेवादार, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों भक्त मौजूद थे. सभी ने इसे तमलूक के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया.

डाक आवरण हजारों वर्ष की पहचान का दस्तावेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक डाक आवरण नहीं, बल्कि तमलूक की हजारों वर्ष पुरानी पहचान का दस्तावेज है. इससे नयी पीढ़ी भी अपनी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकेगी.

Postal Cover on Bargabhima Temple: क्या होंगे फायदे

  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
  • रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
  • सांस्कृतिक संरक्षण को बल मिलेगा.

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