ePaper

संस्थागत धर्म के खतरों के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

Updated at : 06 Nov 2025 1:33 AM (IST)
विज्ञापन
संस्थागत धर्म के खतरों के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

कुछ कट्टर नास्तिक हैं. कुछ ईश्वर के अस्तित्व को लेकर संशय में हैं. कुछ जानबूझकर अपने नाम के बाद उपनाम नहीं लगाते. कुछ कलाई पर शंख और सिंदूर लगाते हैं.

विज्ञापन

संवाददाता, कोलकाता

कुछ कट्टर नास्तिक हैं. कुछ ईश्वर के अस्तित्व को लेकर संशय में हैं. कुछ जानबूझकर अपने नाम के बाद उपनाम नहीं लगाते. कुछ कलाई पर शंख और सिंदूर लगाते हैं. ऐसे विविध विचारों वाले सैकड़ों लोग बुधवार को एक ही छत के नीचे एकत्रित हुए. कोलकाता जिले का पहला नास्तिक सम्मेलन उत्तर कोलकाता के राममोहन पुस्तकालय में आयोजित किया गया. सम्मेलन में वक्ताओं और प्रतिनिधियों द्वारा की गयी चर्चाओं में धार्मिक कट्टरता और ध्रुवीकरण के बढ़ते संदर्भ में तार्किकता स्थापित करने के संघर्ष के साथ-साथ संस्थागत धर्म के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने की पहल की आवश्यकता पर बल दिया गया. राजनीतिक और समाजशास्त्रीय निबंधकार आशीष लाहिड़ी के भाषण में आम लोगों की धार्मिक भावना और संस्थागत धर्म के बीच अंतर का विषय बार-बार उठा.

उन्होंने महिला विश्व कप के सेमीफाइनल में शतक बनाने के बाद जेमाइमा रोड्रिग्ज के रोने का विषय उठाया. उन्होंने कहा, ””कई लोग क्रिकेट खेलने से पहले यज्ञ करते हैं. इसका कोई तर्क नहीं है. इसका अच्छे खेल, फिटनेस या क्रिकेट तकनीक से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन अच्छा खेलने और जीतने के बाद रोड्रिग्ज का रोना भावनात्मक है. यज्ञ में पागलपन है. नास्तिकता पर चर्चा करते हुए शुभरंजन दासगुप्ता ने गैलीलियो का विषय उठाया.

पादरियों द्वारा गैलीलियो पर की गयी क्रूर यातनाओं के बारे में बात करते हुए, उम्र के कारण कमज़ोर हो चुके शुभरंजन लगभग अवाक रह गये. उन्होंने बांग्ला और उर्दू साहित्य में नास्तिकता की लंबी परंपरा का उल्लेख किया. टॉलीगंज के सूर्यनगर की रहने वाली प्रतिमा बनर्जी सिर पर सिंदूर और हाथों में डालियां लिये सम्मेलन में आयीं. प्रतिमा ने कहा, ””हमारे घर में कोई पूजा-पाठ नहीं होता. मेरे पति भी नहीं चाहते कि मैं सिंदूर, डालियां लगाऊं. मैं इन्हें घर पर नहीं लगाती. जब मैं बाहर निकलती हूं तो इन्हें लगाती हूं. इस सम्मेलन में मूर्तियों के सामने नास्तिकता और पितृसत्ता विषय पर चर्चा करते हुए देबस्मिता नाम की एक युवती ने लड़कियों को शंख, सिंदूर या बुर्का पहनने के लिए मजबूर करने की संस्कृति की आलोचना की. वह नास्तिक मंच की केंद्रीय समिति की सदस्य भी हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
AKHILESH KUMAR SINGH

लेखक के बारे में

By AKHILESH KUMAR SINGH

AKHILESH KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola