संवाददाता, कोलकाता
चुनाव आयोग ने उत्तर बंगाल के चाय बागानों में काम करनेवाले मजदूरों के कार्यालयी कागजात को स्वीकृति दे दी है. कागजात जमा करने पर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जायेगा. आयोग ने रविवार को एक अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी. जानकारी के अनुसार, चाय बागानों में काम करने वाले लोग अपनी नौकरी के कागजात दिखाकर अपना नाम दर्ज करा पायेंगे. आयोग का यह आदेश उत्तर बंगाल के सात जिलों के लोगों के लिए है. इसके तहत दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों के बागानों में काम करने वाले मजदूरों को यह सुविधा मिलेगी. मालूम रहे कि बागानों में काम करने वाले कई मजदूरों के पास दस्तावेज नहीं हैं. वे पीढ़ियों से यहां काम कर रहे हैं. उन मजदूरों के नाम शामिल कराने के लिए भाजपा ने आयोग से आवेदन किया था, जिसे स्वीकृति दे दी गयी. इस संबंध में सात जिलों के डीईओ को निर्देश भेज दिये गये हैं.मंजूरी देना बड़ी जीत : शुभेंदु
कोलकाता. नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि निर्वाचन आयोग ने उत्तर बंगाल के सात जिलों की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के लिए पहचान और निवास के वैध दस्तावेजों के रूप में चाय बागान और सिंकोना बागान रोजगार रिकॉर्ड के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है. श्री अधिकारी ने इस फैसले को बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह उत्तर बंगाल की लंबे समय से उपेक्षित आवाजों के लिए है. भाजपा नेता ने कहा : यह मंजूरी उत्तर बंगाल के उन जिलों पर लागू होती है, जहां हमारे मेहनती आदिवासी और वनवासी लोग और बागान श्रमिक दस्तावेजी बाधाओं और राज्य सरकार की लापरवाही के कारण लंबे समय से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहे हैं. भाजपा विधायक ने इन क्षेत्रों के सभी पात्र मतदाताओं से आगे आकर अपने बागान रोजगार रिकॉर्ड का इस्तेमाल करते हुए मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार जनता की सच्ची शक्ति है और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

