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पार्थ व अयन शील शोन अरेस्ट

Updated at : 01 Oct 2024 11:20 PM (IST)
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पार्थ व अयन शील शोन अरेस्ट

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) द्वारा गिरफ्तार राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को अभी तक जमानत नहीं मिली है. अब, उनकी मुश्किलें और बढ़ गयी हैं, क्योंकि मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति घोटाले में चटर्जी को शोन अरेस्ट किया है. उक्त मामले में गिरफ्तार प्रमोटर अयन शील को भी शोन अरेस्ट किया गया है

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कोलकाता.

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) द्वारा गिरफ्तार राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को अभी तक जमानत नहीं मिली है. अब, उनकी मुश्किलें और बढ़ गयी हैं, क्योंकि मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति घोटाले में चटर्जी को शोन अरेस्ट किया है. उक्त मामले में गिरफ्तार प्रमोटर अयन शील को भी शोन अरेस्ट किया गया है. इस दिन स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में केंद्रीय जांच एजेंसी ने दोनों को शोन अरेस्ट के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूर कर लिया गया. हालांकि, सीबीआइ ने दोनों को अपनी हिरासत में लेने का आवेदन नहीं किया था, इसलिए वे फिलहाल संशोधनागार में ही रहेंगे.

इडी ने 23 जुलाई, 2022 को चटर्जी को गिरफ्तार किया था. इडी हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद से ही चटर्जी न्यायिक हिरासत की अवधि प्रेसिडेंसी संशोधनागार में काट रहे हैं. दूसरी ओर वर्ष 2023 के मार्च में मामले के अन्य आरोपी शांतनु बंद्योपाध्याय के करीबी माने जाने वाले प्रमोटर अयन शील को भी इडी ने गिरफ्तार किया है. वह भी संशोधनागार में न्यायिक हिरासत की अवधि काट रहा है. इस दिन स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में केंद्रीय जांच एजेंसी ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति घोटाले में दोनों को शोन अरेस्ट करने का आवेदन किया. चटर्जी और शील वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश किये गये.

सीबीआइ के अधिवक्ता ने अदालत में बताया कि संशोधनागार की ओर से जानकारी दी गयी है कि चटर्जी अस्वस्थता के कारण गत सोमवार से जेल अस्पताल में चिकित्साधीन हैं. दूसरी ओर, पार्थ चटर्जी के अधिवक्ता श्यामल घोष ने कहा : मेरे मुवक्किल बीमार हैं. अदालत से अनुरोध है कि सीबीआइ के आवेदन पर सुनवाई गुरुवार को हो. इसके बाद ही सीबीआइ की ओर से कहा गया कि वे केवल चटर्जी और शील को शोन अरेस्ट करना चाहत है, क्योंकि प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति घोटाले की जांच के तहत उनके पास कुछ नये तथ्य मिले हैं, जिसमें दोनों आरोपियों के उक्त घोटाले में भूमिका होने की बात का पता चला है. ऐसे में दोनों से पूछताछ जरूरी है.

इसके बाद ही न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआइ को भ्रष्टाचार से जुड़े एक अन्य मामले में चटर्जी और शील को लेकर कुछ तथ्य मिले हैं. भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत के तहत मामला चल रहा है. सीबीआइ ने दोनों को अपनी हिरासत में लेने का आवेदन नहीं किया है. ऐसे में शोन अरेस्ट की याचिका मंजूर करने में कोई दिक्कत नहीं है. इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने दोनों को शोन अरेस्ट कर लिया.

क्या है सोन अरेस्ट :

किसी आपराधिक मामले में यदि कोई गिरफ्तार होता है और वह न्यायिक हिरासत में हो. इसी बीच एक अन्य आपराधिक मामले में उस आरोपी के लिप्त होने के तथ्य मिलते हों, जिसके आधार पर संबंधित जांच एजेंसी उसे पुन: गिरफ्तार करना चाहती हो और गिरफ्तार करने के बाद उसे हिरासत में लेना चाहती हो, तो इसके लिए संबंधित कोर्ट में आवेदन करना पड़ता है. यदि अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया, तो वह आरोपी को संबंधित जांच एजेंसी सोन अरेस्ट कर सकती है या जरूरत पड़ने पर हिरासत में ले सकती है. सोन अरेस्ट के बाद जांच एजेंसी संशोधनागार में भी पूछताछ कर सकती है.

जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पार्थ

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिक्षकाें की नियुक्ति घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी द्वारा दायर की गयी जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (इडी) को नोटिस जारी किया है. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुईंया की पीठ ने इस पर इडी से जवाब मांगा है. इस मामले में पार्थ चटर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह पिछले दो साल दो महीने से जेल में हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह दशहरे की छुट्टियों के बाद मामले की अगली सुनवाई करेंगे.

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