जेल से पीएचडी कर रहा माओवादी, जमानत के लिए अब खुद करेगा अपने मामले की पैरवी

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जेल से पीएचडी कर रहा माओवादी, जमानत के लिए अब खुद करेगा अपने मामले की पैरवी

पश्चिम मेदिनीपुर के माओवादी हमले की घटना में दोषी अर्नब दाम उर्फ विक्रम अब अपनी जमानत के लिए स्वयं पैरवी करेगा.

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उम्रकैद की काट रहा है सजा

संवाददाता, कोलकातापश्चिम मेदिनीपुर के सिलदा में इस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स (इएफआर) कैंप पर माओवादी हमले की घटना में दोषी अर्नब दाम उर्फ विक्रम अब अपनी जमानत के लिए स्वयं पैरवी करेगा. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने माओवादी नेता के आवेदन को स्वीकारते हुए उसे अपने मामलों की स्वयं पैरवी करने की इजाजत दे दी है. दो फरवरी को होनेवाली इस सुनवाई में वह खुद अपने मामले की पैरवी करेगा. वह जेल से ही सुनवाई में शामिल होगा. जेल में ही वर्चुअल सुनवाई की आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी. अर्नब बर्दवान केंद्रीय संशोधनागार में बंद है. वकील की फीस देने को पैसे नहीं लीगल एड फोरम ने भी पैरवी से किया इनकार : अर्नब ने कहा था कि उसके पास अपना मुकदमा लड़ने के लिए वकील को फीस देने के पैसे नहीं हैं. लीगल एड फोरम ने भी उसका मामला लेने से इनकार कर दिया है. अब उसके पास स्वयं मामले की पैरवी करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है. मानवाधिकार संगठन एपीडीआर के माध्यम से नियुक्त अधिवक्ता अरिजीत बागची ने अर्नब की ओर से हाइकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि बर्दवान यूनिवर्सिटी ने उसे वह स्कॉलरशिप नहीं दी, जिसका वह हकदार था. इसके बाद कोर्ट ने उसे खुद पैरवी करने की अनुमति दी.

आइआइटी खड़गपुर में इंजीनियरिंग का पूर्व छात्र रह चुका है अर्नब दाम

अर्नब दाम, आइआइटी खड़गपुर में इंजीनियरिंग का छात्र था. इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ कर वह माओवादी संगठन में शामिल हो गया. इस वजह से वह कुछ वर्षों तक पढ़ाई से दूर था. लेकिन सिलदा मामले में गिरफ्तारी के बाद जेल में रहने के दौरान उसने फिर से पढ़ाई शुरू की. वह माओवादी नेता किशनजी का करीबी था. जेल में रहते हुए अर्नब दाम ने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) से इतिहास में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. फिलहाल वह बर्दवान यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएचडी कर रहा है.

क्या है पूरा मामला

15 फरवरी, 2010 को पश्चिम मेदिनीपुर के सिलदा स्थित इएफआर कैंप पर माओवादी हमला हुआ था. हमले में 24 इएफआर जवान शहीद हुए थे. हमले में इएफआर कैंप से आइएनएसएएस और असॉल्ट कलाश्निकोव (एके) सीरीज की अत्याधुनिक राइफलें और कार्बाइन समेत बड़ी संख्या में हथियारों की भी लूट हुई थी. हमले के दौरान पांच माओवादी भी मारे गये थे. इस हमले के मुख्य आरोपी के तौर पर अर्नब उर्फ विक्रम की पहचान हुई थी. पुलिस ने उसे 2012 में आसनसोल से गिरफ्तार किया था. उसे पहले पश्चिम मेदिनीपुर जेल में, फिर हुगली के चुंचुड़ा सुधार गृह और फिलहाल बर्दवान केंद्रीय संशोधनागार में रखा गया है.

जेल में रहने के दौरान ही माओवादी एरिया कमांडर अर्नब दाम ने बर्दवान विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में टॉप किया था. अर्नब इतिहास में पीएचडी में दाखिला लेने के लिए बर्दवान विश्वविद्यालय में आयोजित इंटरव्यू में शामिल हुआ था. उक्त प्रवेश परीक्षा में कुल 220 कैंडिडेट शामिल हुए थे. उन सभी को पछाड़ कर अर्नब दाम ने प्रथम स्थान हासिल किया था. शिक्षा ग्रहण करने की लगन को उसने जेल में भी नहीं छोड़ा. उसने जेल में रहकर स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की.

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Akhilesh Kumar Singh

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