राज्य के तीन अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई संभव

Updated at : 06 Jan 2026 2:05 AM (IST)
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राज्य के तीन अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई संभव

राज्य के तीन अस्पतालों पर अलग-अलग मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन (डब्ल्यूबीसीइआरसी) के द्वारा कार्रवाई की जा सकती है.

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सख्ती. दोबारा सुनवाई के बाद सुनाया जायेगा फैसला

संवाददाता, कोलकाता

राज्य के तीन अस्पतालों पर अलग-अलग मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन (डब्ल्यूबीसीइआरसी) के द्वारा कार्रवाई की जा सकती है. डब्ल्यूबीसीइआरसी ने नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल को इलाज खर्च लौटाने का निर्देश दिया है. साथ ही इस मामले में आयोग दोबारा सुनवाई कर सकता है. इसके बाद अस्पताल के खिलाफ फैसला सुनायेगा.

यह जानकारी सोमवार को कमीशन के चेयरमैन एवं पूर्व जस्टिस असीम कुमार बनर्जी ने दी. उन्होंने बताया कि मुर्शिदाबाद के निवासी समसुल हक अपनी मां को चिकित्सा के लिए इस अस्पताल में ले गये थे. वहां पहले डॉ अमिताभ राय ने मरीज को देखा. डॉक्टर ने अल्ट्रा सोनोग्राफी रिपोर्ट देखकर बताया कि गॉलब्लैडर (पित्ताशय) में स्टोन है. ऐसे में मरीज के अस्पताल के ही डॉ पटनायक के पास रेफर किया. पथरी को निकालने के लिए मरीज को डोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियो पैन्क्रियाटोग्राफी (ईआरसीपी) के लिए गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में रेफर किया गया, जहां डॉ पटनायक ने मरीज का ईआरसीपी किया, पर स्टोन का पता नहीं चला, तो चिकित्सक ने एमआरसीपी किया. इससे मरीज की हालत बिगड़ गयी. ऐसे में मरीज को स्थिर किये बगैर उसे जगन्नाथ गुप्ता मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया, जहां मरीज की मौत हो गयी. वहीं जांच में पता चला है कि डॉ पटनायक गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट नहीं हैं. वह अपने 30 वर्ष के अनुभव के आधार पर ऐसे मरीजों का इलाज करते हैं.

अस्पताल भी डॉ पटनायक को एसोसिएट कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट बताता है. इस मामले में आयोग ने प्रो डॉ माखल लाल साहा की राय ली है. उनके अनुसार को पहले एमआरसीपी किया जाना चाहिए था. ऐसे में अस्पताल से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है. इसके बाद दोबारा इस मामले की सुनवाई होगी, पर इस सुनवाई से कमशीन अस्पताल को मरीज के इलाज खर्च करीब 40 हजार रुपये लौटाने का निर्देश दिया है.

इन दोनों अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है कमीशन

एक अन्य मामले में सीएमआरआइ और भागीरथी नेवोटिया के खिलाफ भी कमीशन कार्रवाई कर सकता है. चेयरमैन असीम कुमार बनर्जी ने बताया कि सौरव मिश्रा अपनी पत्नी को प्रसव के लिए भागीरथी नेवोटिया हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे. उनकी पत्नी की ब्लीडिंग हो रही थी. वहां सौरव को बताया गया कि मरीज का ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (टीवीएस) करना होगा, पर रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं था, इसलिए सौरव सीएमआरआइ से संपर्क कर वहां पहुंचा, पर सीएमआरआइ में भी टीवीएस नहीं हुआ. इसके बाद सौरव अपनी पत्नी को लेकर वुडलैंड्स हॉस्पिटल पहुंचा, पर तक तब गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी. कमीशन इस मामले को भी दोबारा सुनेगा. इस मामले में मरीज के परिजन और दोनों अस्पतालों से स्पष्टीकरण मागा गया है. साथ ही कमीशन भी घटना की जांच के लिए इन दोनों अस्पतालों का दौरा करेगा.

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