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सरकारें अब आलोचनाओं को बर्दाश्त नहीं कर पातीं

Updated at : 21 Aug 2025 10:22 PM (IST)
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सरकारें अब आलोचनाओं को बर्दाश्त नहीं कर पातीं

राज्य सरकार द्वारा खुली अदालत में दोषी आतंकवादी आफताब अंसारी से तुलना किये जाने पर जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और शोधकर्ता हिंदोल मजूमदार ने कहा कि वह किसी भी तरह की आलोचना के प्रति ‘असहिष्णु’ सरकार से इससे बेहतर उपमा की उम्मीद नहीं कर सकते. हिंदोल मजूमदार पर राज्य के एक मंत्री के काफिले पर हमले की साजिश रचने का आरोप है.

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कोलकाता.

राज्य सरकार द्वारा खुली अदालत में दोषी आतंकवादी आफताब अंसारी से तुलना किये जाने पर जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और शोधकर्ता हिंदोल मजूमदार ने कहा कि वह किसी भी तरह की आलोचना के प्रति ‘असहिष्णु’ सरकार से इससे बेहतर उपमा की उम्मीद नहीं कर सकते. हिंदोल मजूमदार पर राज्य के एक मंत्री के काफिले पर हमले की साजिश रचने का आरोप है.

इस मामले में मजूमदार को अलीपुर की एक अदालत ने जमानत दे दी और बायोमेडिसिन में अपना शोध जारी रखने के लिए दो सप्ताह बाद स्पेन लौटने की अनुमति दे दी है.

हिंदोल मजूमदार ने कहा : जब मैंने सुना कि सरकारी वकील ने मेरी तुलना एक दोषी आतंकवादी से की है, तो मैं पहले तो हैरान रह गया. मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. उन्होंने कहा : बाद में मैंने इस पर विचार किया और सोचा कि इस सरकार से मुझे इससे बेहतर की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि आज समाज में यही सोच हावी है कि अगर कोई आपकी आलोचना करता है, तो यह मान लिया जाता है कि वह व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाना चाहता है, जबकि ऐसा नहीं है. मार्च में जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु के काफिले पर हमले की साजिश रचने के आरोपी मजूमदार को यूरोप से लौटने के बाद दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तारी के पांच दिन बाद सोमवार को जमानत दे दी गयी.

कोलकाता पुलिस के मुख्य लोक अभियोजक ने जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र की अंसारी से तुलना किसी अपराध की साजिश रचने में ‘परिस्थितिजन्य समानता’ के आधार पर की थी. अंसारी कोलकाता में 2002 के अमेरिकन सेंटर हमले का मास्टरमाइंड है और इस मामले में उसे मौत की सजा सुनायी गयी थी.

श्री मजूमदार ने तर्क दिया कि सरकार की उनकी आलोचनाएं प्रशासन को वर्तमान स्थिति से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से थीं.

उन्होंने कहा : मैं जो भी कहने की कोशिश करता हूं, वह यह है कि सरकार के पास अपनी समस्याओं से निबटने के लिए सभी संसाधन हैं. वह खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर है. यह लोगों के जीवन में सुधार लाने के मामले में अभी जो कर रही है, उससे कहीं बेहतर कर सकती है. लेकिन वह असहमति को स्वीकार करने में असफल रही.

यह पूछा गया कि उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस का क्या हुआ और क्या अब उसे हटा दिया गया है? इस पर मजूमदार ने अफसोस जताते हुए कहा : मुझे उसकी स्थिति के बारे में भी ठीक से पता नहीं है.

””भारत की लोकप्रिय संस्कृति में हुआ है बड़ा बदलाव””

जादवपुर विश्वविद्यालय के फार्मास्युटिकल्स इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र ने कहा : केवल जब आप अपने देश से बहुत प्यार करते हैं, तब आप चाहते हैं कि यह बेहतर के लिए बदले. उन्होंने कहा : दुर्भाग्य से, भारत की लोकप्रिय संस्कृति में भी एक बड़ा बदलाव हुआ है. रंग दे बसंती, स्वदेश और चक दे इंडिया जैसी फिल्में शासन प्रणाली में व्याप्त बुराइयों की ओर इशारा करती हैं, साथ ही राष्ट्रप्रेम पर गर्व भी जताती हैं. यह अब घटकर केवल सत्ताधारियों का गुणगान करने तक सीमित हो गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIJAY KUMAR

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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