एसआइआर के दौरान हिंसा व बाधा जैसी घटनाएं हुईं : आयोग

आयोग ने कहा कि ये घटनाएं अन्य राज्यों में हुई गणना प्रक्रिया से बिल्कुल अलग थीं, जहां एसआइआर चरण सुचारू रूप से और बिना किसी घटना के पूरा हुआ.
कोलकाता. चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत गणना के दौरान चुनाव अधिकारियों के खिलाफ हिंसा, धमकी और कार्य में व्यवधान की कई घटनाएं सामने आयीं. आयोग ने कहा कि ये घटनाएं अन्य राज्यों में हुई गणना प्रक्रिया से बिल्कुल अलग थीं, जहां एसआइआर चरण सुचारू रूप से और बिना किसी घटना के पूरा हुआ. हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए 2025 की मतदाता सूचियों का उपयोग संभव नहीं है, क्योंकि एसआइआर के दौरान 58 लाख से अधिक अनुपस्थित, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान की गयी. इसके साथ ही चुनावी पंजीकरण अधिकारियों द्वारा लगभग 1.51 करोड़ नोटिस जारी किये गये हैं. निर्वाचन आयोग ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों में बीएलओ द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर व्यापक अनिच्छा देखी गयी. कई मामलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही एफआइआर दर्ज की जा सकी. आयोग ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्राथमिकी दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित आयोग के निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया. हलफनामे में 24 नवंबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कोलकाता कार्यालय के घेराव का भी उल्लेख किया गया है. आयोग के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जबरन प्रवेश का प्रयास किया, पुलिस बैरिकेड तोड़े, कार्यालय में तोड़फोड़ की, अधिकारियों के काम में बाधा डाली और परिसर को लगभग 28 घंटे तक बंद रखा. इसके बावजूद न तो कोई मामला दर्ज किया गया और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई. आयोग ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा खतरे के आकलन के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गयी और वह देश के एकमात्र निर्वाचन अधिकारी हैं जिन्हें इस स्तर की सुरक्षा दी गयी. इन सभी परिस्थितियों के बावजूद, हलफनामे में कहा गया कि बीएलओ ने 92.40 प्रतिशत गणना कार्य पूरा किया और 7.08 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र एकत्र किये गये. उल्लेखनीय है कि इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिया था कि एसआइआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इससे किसी को अनावश्यक असुविधा नहीं होनी चाहिए. अदालत ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित किये जायें, जहां दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जा सकें.
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