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अनुमति मिली तो एसआइआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में करूंगी पैरवी : ममता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान किये गये अमानवीय आचरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी.

एसआइआर के दौरान हो रहे अमानवीय आचरण के खिलाफ मंगलवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की जायेगी

संवाददाता, सागरद्वीप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान किये गये अमानवीय आचरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी.

दक्षिण 24 परगना जिले के सागरद्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एसआइआर प्रक्रिया से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है. हम एसआइआर के कारण हुए अमानवीय व्यवहार और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को याचिका दायर करेंगे.मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने सारे लोगों की मौत और आम जनता को जिस तरह से परेशान किया जा रहा है, यह अब बर्दाश्त के बाहर हो गया है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सुप्रीम कोर्ट में जनता की तरफ से पैरवी करेंगी. लेकिन वकील के रूप में नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर बोलेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआइआर प्रक्रिया के दौरान जमीनी स्तर पर जो हो रहा है, उसका आंखों देखा हाल वह अदालत के समक्ष रखने की कोशिश करेंगी. मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि याचिका वह दायर करेंगी, राज्य सरकार द्वारा दायर की जायेगी या फिर तृणमूल कांग्रेस की ओर से मामला दायर किया जायेगा.

सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिना वैध कारणों के मतदाता सूची से नामों को मनमाने ढंग से हटाया जा रहा है, जिससे विधानसभा चुनावों से पहले एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया डर पैदा करने वाली प्रक्रिया बन गयी है. उन्होंने दावा किया कि गंभीर रोग से ग्रसित लोगों और बुजुर्ग नागरिकों को यह साबित करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर किया जा रहा कि वे वैध मतदाता हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई भाजपा नेताओं के बूढ़े माता-पिता को पहचान साबित करने के लिए लाइन में खड़ा कर दे, तो उन्हें कैसा लगेगा?

भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषियों पर हो रहे हमले की निंदा की: इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के साथ कथित भेदभाव का भी आरोप लगाया. मुख्यमंत्री ने कहा: मैं उन्हें मुझे जान से मारने की चुनौती देती हूं, लेकिन मैं अपनी मातृभाषा बोलना बंद नहीं करूंगी. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या देश में बांग्ला बोलना अपराध बन गया है? मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से पहले लोगों को प्रलोभन देती है और चुनाव जीतने के बाद दमनकारी कार्रवाई करती है. उन्होंने कहा कि वे चुनाव से पहले 10,000 रुपये देते हैं और चुनाव खत्म होने के बाद बुलडोजर चला देते हैं.

बंगाल में नहीं बनेगा कोई डिटेंशन कैंप: मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘मिस्टर वैनिश कुमार’ आप अपने आकाओं के कहने पर लोगों का नाम काट रहे हैं. वह जैसा आदेश दे रहे हैं, आप वैसा ही कर रहे हैं. यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे और न ही यहां (पश्चिम बंगाल) कोई डिटेंशन कैंप बनेगा.

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