ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्कूलों में एस्बेस्टस छत पर प्रतिबंध की मांग खारिज की

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ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्कूलों में एस्बेस्टस छत पर प्रतिबंध की मांग खारिज की

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में एस्बेस्टस छतों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

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पर्यावरण मंत्रालय से छह माह में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा

एनजीटी के फैसले का यूएएल बंगाल ने किया स्वागत

प्रतिनिधि, खड़गपुर.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में एस्बेस्टस छतों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इस फैसले का देशभर के एस्बेस्टस उत्पाद निर्माताओं और उद्योग निकायों ने स्वागत किया है. खड़गपुर ग्रामीण क्षेत्र के खेमाशूली के पास तुंगादुआ में स्थित यूएएल बंगाल कंपनी के अधिकारियों ने भी ट्रिब्यूनल के आदेश का स्वागत किया. कंपनी के महाप्रबंधक सुनील कुमार पांडे ने कहा, “हम अपने संयंत्र में उच्चतम पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उत्पादन करते हैं. एस्बेस्टस शीटिंग एक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती निर्माण सामग्री है. हम इस फैसले से बेहद संतुष्ट हैं.”

बता दें कि डॉ राजा सिंह नामक व्यक्ति ने एनजीटी में एक याचिका दायर की थी, जिसमें देश के स्कूलों में एस्बेस्टस छतों के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गयी थी. उनका तर्क था कि समय के साथ एस्बेस्टस शीट भंगुर हो जाती हैं और उनसे निकलने वाले रेशे हवा में फैलकर छात्रों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

उन्होंने इसके स्थान पर वैकल्पिक सामग्री के उपयोग का सुझाव भी दिया था. सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया. मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्कूलों जैसे गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में एस्बेस्टस के उपयोग से मानव स्वास्थ्य को किसी प्रकार का खतरा होने के प्रमाण नहीं मिले हैं, क्योंकि इन उत्पादों में एस्बेस्टस रेशे मजबूती से बंधे रहते हैं. रिपोर्ट पर विचार करने के बाद एनजीटी ने कहा कि वह वैज्ञानिक विनियमन का समर्थन करता है, न कि मनमाने प्रतिबंधों का. ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यदि एस्बेस्टस निर्माण उद्योग भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के मानकों के अनुसार संचालित होते हैं, तो उन्हें लेकर किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए. साथ ही, एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगले छह महीनों के भीतर एस्बेस्टस उत्पादों के निर्माण, रखरखाव और निपटान से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये जायें.

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Akhilesh Kumar Singh

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