कोर्ट ने पूछा-एसआइआर 2002 की मतदाता सूची के आधार पर क्यों?

हाइकोर्ट ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया 2002 की मतदाता सूची के आधार पर क्यों की जा रही है.
उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से 19 नवंबर तक मांगा जबावसंवाददाता, कोलकाता कलकत्ता हाइकोर्ट ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया 2002 की मतदाता सूची के आधार पर क्यों की जा रही है. अदालत ने उस जनहित याचिका पर आयोग से जवाब तलब किया है जिसमें याचिकाकर्ता ने एसआइआर की प्रक्रिया 2002 की मतदाता सूची के आधार पर करने को चुनौती दी है. गौरतलब है कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर कर रहा है. पश्चिम बंगाल में अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं. आयोग ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह याचिका विचार करने योग्य ही नहीं है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल व न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने आयोग को जनहित याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए 19 नवंबर तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी. याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया है कि इसीआइ को दस्तावेजों और सूचना के आधार पर 2025 की स्थिति के अनुसार ही एसआइआर प्रक्रिया के निर्देश दिये जायें. इसीआइ की ओर से पेश अधिवक्ता अनामिका पांडे ने पीठ के समक्ष दलील दी कि यही मुद्दा उच्चतम न्यायालय में भी लंबित है, इसलिए यह रिट याचिका विचारणीय ही नहीं है. याचिकाकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर मतदान प्रक्रिया संचालित करने वाले बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए पर्याप्त सुरक्षा की भी मांग की है. उनका दावा है कि उनमें से कुछ को काम के दौरान भयपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ रहा है. अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष कहा कि अंतिम एसआइआर 2002 में की गयी थी. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 2002 की मतदाता सूची पर आधारित पुनरीक्षण प्रक्रिया मतदाता सूचियों की सटीकता और पारदर्शिता को प्रभावित करती है. उन्होंने मांग की कि इस बार की पुनरीक्षण प्रक्रिया ‘साल 2025 के वर्तमान दस्तावेजों और सूचनाओं’ के आधार पर की जाये. निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया वर्ष 2002 में की गयी थी और वर्तमान प्रक्रिया आयोग के स्थापित नियमों के अनुसार ही चल रही है.
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