कोलकाता.
चुनाव आयोग ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान आइ-पैक के कर्मचारियों को कथित तौर पर डेटा-एंट्री ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किये जाने संबंधी शिकायतों की समीक्षा करने का फैसला किया है. आरोप है कि इन्हें अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मचारी दिखाया गया है. चुनाव आयोग ने यह कदम पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोलकाता में आइ-पैक के कार्यालय और संस्था के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर छापेमारी को लेकर उठे विवाद के बीच उठाया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग ने एसआइआर प्रक्रिया में डेटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर अनुबंध पर नियुक्त किये गये राज्य सरकार के कर्मचारियों के बैकग्राउंड की दोबारा जांच करने का फैसला किया है. अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मचारियों को पुनरीक्षण प्रक्रिया में डेटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर पर नियुक्त करने से पहले अनिवार्य रूप से किये जाने वाले पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट की दोबारा जांच पर जोर दिया जा रहा है. डेटा-एंट्री ऑपरेटरों का मुख्य काम बीएलओ की तरफ से जुटाये गये और संबंधित ईआरओ और एईआरओ को सौंपे गये मतदाता गणना फॉर्म की जानकारी को मैनुअल रूप से दर्ज करना है. इसलिए इस स्टेज पर की गयी गलत एंट्री फाइनल मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम बनाये रखने के बारे में आखिरी फैसले पर असर डाल सकती है. बताया जा रहा है कि, पहले ही तीन चरणों वाली एसआइआर प्रक्रिया के पहले चरण यानी गिनती के चरण के बाद गलत एंट्री के ऐसे मामले सामने आये थे, जिनसे मतदाताओं के एक खास वर्ग को परेशानी हुई थी. इसलिए आयोग डेटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर पर नियुक्त अनुबंधित राज्य सरकारी कर्मचारियों के बैकग्राउंड की दोबारा जांच की मांग को काफी गंभीरता से ले रहा है. राज्य में ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को जारी की गयी थी. अंतिम सूची 14 फरवरी को जारी की जायेगी. इसके बाद ही आयोग चुनाव की तारीखों का एलान करेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

