एलपीजी संकट : 16 को सड़क पर उतरेंगी ममता

एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी और देश में बढ़ते ईंधन संकट के खिलाफ मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी सड़क पर उतरने जा रही हैं. तृणमूल की ओर से 16 मार्च यानी सोमवार को कोलकाता में इस मामले को लेकर विरोध रैली का आह्वान किया गया है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करेंगी.
कोलकाता.
एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी और देश में बढ़ते ईंधन संकट के खिलाफ मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी सड़क पर उतरने जा रही हैं. तृणमूल की ओर से 16 मार्च यानी सोमवार को कोलकाता में इस मामले को लेकर विरोध रैली का आह्वान किया गया है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करेंगी. यह रैली शाम करीब चार बजे कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर डोरिना क्रॉसिंग पर समाप्त होगी. मुख्यमंत्री ने मौजूदा गैस संकट और बढ़ती कीमतों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि पश्चिम एशिया संकट कई दिनों से बना हुआ है. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने समय रहते कोई तैयारी या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की. उनके अनुसार गैस जैसी जरूरी वस्तु की आपूर्ति को लेकर केंद्र की लापरवाही के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सुश्री बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के गैस बुकिंग के लिए नया नियम लागू कर दिया है, जिसके तहत 25 दिन से पहले दोबारा गैस बुक नहीं की जा सकती. उनका कहना है कि इस फैसले से आम लोगों की चिंता और परेशानी और बढ़ गयी है. इसी मुद्दे को लेकर वह सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेंगी. मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि देश में कुल कितने गैस भंडार उपलब्ध हैं, इस बारे में सरकार ने स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी. उनका कहना है कि केंद्र को संसद में यह बताना चाहिए कि देश में कितना गैस भंडार मौजूद हैं और सभी राज्यों को समान रूप से गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए.तृणमूल ने केंद्र को घेराकोलकाता. एलपीजी सिलिंडरों की बढ़ी कीमत और आपूर्ति संकट को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. गुरुवार को यहां तृणमूल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और पार्टी नेता तन्मय घोष ने इस मुद्दे पर कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध अचानक नहीं शुरू हुआ, बल्कि कई महीनों से स्थिति धीरे-धीरे गंभीर हो रही थी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री खुद युद्ध तेज होने से पहले इस्राइल में मौजूद थे, तब केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर पहले से कोई रणनीतिक तैयारी क्यों नहीं की? भारत अपनी तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की लगभग 60 प्रतिशत आवश्यकता का आयात करता है, जिसमें से 85 से 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है. यह जानकारी पहले से सबको थी. इसके बावजूद केंद्र ने न तो कोई वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तैयार किया और न ही रणनीतिक भंडार बनाया. ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ आपात बैठक की. उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि हल्दिया, कल्याणी और दुर्गापुर की रिफाइनरियों में तैयार गैस को स्थिति सामान्य होने तक राज्य से बाहर न भेजा जाये. साथ ही मिड डे मील, आइसीडीएस केंद्रों, अस्पतालों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. वहीं, तृणमूल नेता तन्मय घोष ने केंद्र की विदेश नीति की आलोचना की है.
इस्कॉन की प्रसाद सेवा पर संकट के बादलकोलकाता. अमेरिका-इस्रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारतीय घरों और मंदिरों तक पहुंच गया है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर सख्ती बरती है. इससे होटल, रेस्टोरेंट, और बड़े पैमाने पर खाना बनाने वाली जगहों पर संकट है. ऐसे में कोलकाता के इस्कॉन मंदिर के राधारमण दास ने एलपीजी संकट पर प्रतिक्रिया दी. राधारमण दास ने बताया कि ऐसा संकट उन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा. मंदिर में बड़े स्तर पर प्रसाद बनता है, इसलिए वे घरेलू और कॉमर्शियल दोनों कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर प्रसाद बनाने के लिए सिर्फ घरेलू कनेक्शन पर्याप्त नहीं होते. उन्होंने कहा कि जब इस्कॉन के फाउंडर आचार्य श्रील प्रभुपाद ने इस संस्थान की स्थापना की थी तो उन्होंने निर्देशन दिया था कि किसी इस्कॉन मंदिर के 10 किमी के दायरे में कोई भी खाली पेट नहीं सोयेगा. इसी वजह से दुनिया भर में 1,250 से ज्यादा इस्कॉन मंदिर हर शाम मुफ्त प्रसाद बांटते हैं.
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