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विश्व स्ट्रोक दिवस आज : जागरूकता और समय पर इलाज से बच सकती है जान

Updated at : 29 Oct 2025 1:33 AM (IST)
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विश्व स्ट्रोक दिवस आज : जागरूकता और समय पर इलाज से बच सकती है जान

इस्केमिक स्ट्रोक (खून के थक्के के कारण रुकावट) जो लगभग 90% मामलों में होता है, और हेमोरेजिक स्ट्रोक (रक्त वाहिका फटने से रक्तस्राव) जो लगभग 10% होता है.

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कोलकाता. जागरूकता को बढ़ाने के लिए 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है. ऐसे में वर्ल्ड स्ट्रोक डे के पूर्व संध्या कोलकाता स्थित अपोलो मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ देवर्षि चटर्जी ने स्ट्रोक के बढ़ते मामलों, खासकर युवाओं में से निपटने के लिए लोगों में अधिक जागरूकता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और वित्तीय तैयारी की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया. डॉ चटर्जी ने बताया कि स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं. इस्केमिक स्ट्रोक (खून के थक्के के कारण रुकावट) जो लगभग 90% मामलों में होता है, और हेमोरेजिक स्ट्रोक (रक्त वाहिका फटने से रक्तस्राव) जो लगभग 10% होता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लक्षणों (जैसे अंगों में कमजोरी, बोलने में कठिनाई या लकवा) के शुरू होने के बाद ””””गोल्डन आवर”””” यानी पहले तीन घंटों के भीतर किसी स्ट्रोक केंद्र (अस्पताल) तक पहुंचना जरूरी है. खासकर इस्केमिक स्ट्रोक के मामले में. गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचने पर इस बीमारी को पूरी तरह से मात दिया जा सकता है. हालांकि, डॉ चटर्जी ने मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कोलकाता में केवल दो से तीन ही ऐसे केंद्र हैं जो 24 घंटे स्ट्रोक प्रबंधन में सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि महानगर के कुछ और केंद्र खोले जाने की आवश्यकता है. डॉ चटर्जी ने कहा कि जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके कारण लोग अक्सर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए कई दिनों तक इंतजार करते हैं. इसी वजह से कई मरीज समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण जीवन भर की विकलांगता के साथ जीने को मजबूर होते हैं. इसके अलावा निजी अस्पतालों में इस बीमारी के इलाज का सीन से साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आ सकता है. इसलिए उन्होंने स्वास्थ्य बीमा की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि कई परिवारों के लिए अपनी जेब से इतना खर्च उठाना मुश्किल होता है. डॉ चटर्जी ने बताया कि जहां स्ट्रोक अभी भी 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में अधिक आम है (लगभग 75% मामले), वहीं अब 15–16% स्ट्रोक 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं खासकर कोलकाता जैसे शहरी केंद्रों में. इसका मुख्य कारण गतिहीन जीवनशैली, धूम्रपान, अस्वस्थ खान-पान और तनाव है. उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल में, विशेष रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा और कोलकाता के कुछ हिस्सों में मोयामोया के मामले बढ़ रहे हैं. यह एक दुर्लभ रक्त वाहिका संबंधी रोग है जिसमें मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली प्रमुख धमनियां संकरी या बंद हो जाती हैं. जो बच्चों में स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण है. इस स्थिति में मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह धीरे-धीरे कम हो जाता है और इसे ठीक करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और डिस्लिपिडेमिया स्ट्रोक के मुख्य कारक है और कई मामलों में लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें ये स्थितियां हैं, जब तक कि स्ट्रोक नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि धूम्रपान, शारीरिक व्यायाम की कमी, अस्वस्थ नींद की आदतें और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और अस्वस्थ वसा का अधिक सेवन भी स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं. उन्होंने जोक देते हुए कहा कि नियमित जांच, समय पर दवा और जीवनशैली में बदलाव से इस बीमारी से बचा जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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