जितना समझाया, उसके अनुसार जीवन बनायें: अनुराग कृष्ण शास्त्री
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Dec 2019 12:48 AM
कोलकाता : सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण से आर्थिक सहायता मांगने एक पोटली में थोड़े से भूने हुए चने लेकर गये थे, जिसे भगवान ने बहुत चाव से खाया था. लेकिन सुदामा ने हिचक की वजह से कृष्णजी से अपने लिए मदद नहीं मांगी थी. वह बिना कुछ मांगे ही उनसे विदा लेकर अपने […]
कोलकाता : सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण से आर्थिक सहायता मांगने एक पोटली में थोड़े से भूने हुए चने लेकर गये थे, जिसे भगवान ने बहुत चाव से खाया था. लेकिन सुदामा ने हिचक की वजह से कृष्णजी से अपने लिए मदद नहीं मांगी थी. वह बिना कुछ मांगे ही उनसे विदा लेकर अपने घर लौट गये. लेकिन वापस पहुंचने पर उन्होंने देखा कि उनके टूटे फूटे झोपड़े के स्थान पर एक महल खड़ा था और उसकी गरीब पत्नी और बच्चों को अच्छे वस्त्र मिले थे.
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