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कोलकाता में सहेज कर रखे जा रहे दुर्गा पूजा पंडाल, जानें क्‍या है मामला

Updated at : 13 Oct 2019 9:54 PM (IST)
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कोलकाता में सहेज कर रखे जा रहे दुर्गा पूजा पंडाल, जानें क्‍या है मामला

।। शिव कुमार राउत ।। कोलकाता : महानगर का विश्व प्रसिद्ध दुर्गापूजा ‘पर्यावरण संरक्षण’ का पर्याय बन कर उभरा है. यहां पूजा पंडाल सहेज कर रखे जा रहे हैं. लाखों के खर्च व महीनों की मेहनत से बने पूजा पंडाल अब कूड़े के ढेर में तब्दील ना होकर ‘रियूज व रिसाइकिल’ किये जा रहे हैं, […]

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।। शिव कुमार राउत ।।

कोलकाता : महानगर का विश्व प्रसिद्ध दुर्गापूजा ‘पर्यावरण संरक्षण’ का पर्याय बन कर उभरा है. यहां पूजा पंडाल सहेज कर रखे जा रहे हैं. लाखों के खर्च व महीनों की मेहनत से बने पूजा पंडाल अब कूड़े के ढेर में तब्दील ना होकर ‘रियूज व रिसाइकिल’ किये जा रहे हैं, क्योंकि ये पंडाल इको फ्रेंडली समाग्री जैसे बांस, रस्सी, लकड़ी, मिट्टी और उपले जैसी चीजों से बने हैं. ऐसे ही कुछ इको-फेंडली नेचर के पूजा पंडाल हैं.

* त्रिधारा अकाल बोधन

दक्षिण कोलकाता के प्रसिद्ध पूजा कमेटियों में शामिल त्रिधारा का पूजा पंडाल हर साल विशेष थीम पर तैयार किया जाता है. गौरांग कुइला हर साल इस पूजा कमेटी के पंडाल को तैयार करते हैं. गौरांग ने बताया कि पूजा पंडाल को तैयार करने में प्लास्टिक व थर्मोकॉल के बदले प्राकृतिक समाग्री जैसे बांस लकड़ी व मिट्टी को इस्तेमाल में लाते हैं.

इस साल भी त्रिधारा की पूजा पंडाल को तैयार करने में बांस, लकड़ी व धागा का अधिक इस्तेमाल किया गया है. उन्होंने बताया कि पूरे मंडप को उठा कर चंदननगर ले जाया जा रहा है. यहां हेला पुकुरधार में जगद्धात्री पूजा पंडाल को इसी मंडप से तैयार किया जायेगा, क्योंकि दुर्गापूजा के बाद काली पूजा और जगद्धात्री पूजा में ज्यादा समय का अंतर नहीं रहता है.

मंडप के दोबारा इस्तेमाल से समय और धन दोनों की बचत हो जाती है, क्योंकि आम तौर पर एक मंडप को तैयार करने में 30-40 दिन लग जाते हैं, लेकिन अगर इसी मंडप को दोबारा दूसरी जगह इस्तेमाल करने पर 10-14 दिन में ही एक मंडप तैयार हो जाता है. एक मंडप को कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

* नाकतला उदयन संघ

नाकतला उदयन संघ का मंडप तैयार करनेवाले कलाकार भवतोष शुतार ने बताया कि समय के साथ पूजा के मायने भी बदले हैं. आरोग्य रहने के लिए जरूरी है स्वच्छ व शुद्ध वतावरण. दुर्गापूजा तो आराधना व भक्ति का पर्व है. इसलिए नाकतला के मंडप को मिट्टी के घड़े, पुआल व बांस से तैयार किया गया था. मंडप निर्माण में लगे 100 फीसदी सामग्री को दुबारा प्रयोग किया जा सकता है.

हालांकि महानगर में थीम पूजा के बढ़ते चलन के कारण पंडाल को तैयार करने में प्लास्टिक व थर्मोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है और पूजा के बाद इन मंडपों को नष्ट करने से प्रदूषण फैलता है. इसलिए हम कलाकारों को रिसाइकिल होने वाले वस्तुओं का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए.

* सुरुचि संघ :

सुरुचि संघ का मंडप इस बार बांस, लोहा की पाइप व लोहे की चादर से तैयार किया गया था. पूजा कमेटी का कहना है कि लोहे को बेच देंगें, जिससे पूजा कमेटी को अगले साल के लिए कुछ सहायता मिल जायेगी.

गौरतलब है कि भवतोष शुतार ने ही सुरुचि संघ के मंडप को तैयार किया है. श्री शुतार का कहना है कि पूजा के दौरान विज्ञापन के लिए काफी बैनर व पोस्टर से भी हमारे आखों को नुकसान पहुंचता है. इसलिए पूजा बाद उनका भी रिसाइकिल होना जरूरी है.

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