कोलकाता में भी होगा लिवर संबंधी विश्वस्तरीय इलाज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Aug 2019 1:57 AM

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कोलकाता/रांची : मेडिका अस्पताल, कोलकाता ने प्रो (डॉ) टॉम चेरियन द्वारा स्थापित साउथ एशियन लिवर इंस्टीट्यूट के सहयोग से मेडिका सेंटर फॉर लिवर डिजीज की शुरुआत की है. प्रो टॉम बड़े अस्पताल समूह एचबीपी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के राष्ट्रीय निदेशक थे. वह फिलहाल हैदराबाद स्थित निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (निम्स) में ट्रांसप्लांट सर्जरी […]

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कोलकाता/रांची : मेडिका अस्पताल, कोलकाता ने प्रो (डॉ) टॉम चेरियन द्वारा स्थापित साउथ एशियन लिवर इंस्टीट्यूट के सहयोग से मेडिका सेंटर फॉर लिवर डिजीज की शुरुआत की है. प्रो टॉम बड़े अस्पताल समूह एचबीपी सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट के राष्ट्रीय निदेशक थे. वह फिलहाल हैदराबाद स्थित निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (निम्स) में ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रोफेसर हैं.

भारत लौटने से पूर्व ब्रिटेन में उन्होंने 400 से ज्यादा लिवर प्रत्यारोपण किया था. भारत में भी वह अब तक 250 लिवर प्रत्यारोपण कर चुके हैं. इनमें 90 फीसदी से ज्यादा मरीजों को जीवनदान मिला है. इसके अलावा उन्होंने 50 लिवर कैंसर सर्जरी भी की है, जिनमें मृत्युदर लगभग नगण्य थी.
मेडिका सेंटर फॉर लिवर डिजीज पूर्वी भारत के उन चंद अस्पतालों में से एक है, जहां प्रत्यारोपण सर्जरी सहित, लिवर संबंधी जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा है. मेडिका सेंटर फॉर लिवर डिजीज के बारे में प्रो टॉम ने कहा कि हम चाहते हैं कि यहां लिवर संबंधी बीमारियों का विश्वस्तरीय इलाज हो. इसका मतलब यह है कि लिवर की बीमारी का इलाज चाहे लंदन में हो या कोलकाता में, इसमें कोई अंतर नहीं होना चाहिए.
इधर, मेडिका अस्पताल समूह के चेयरमैन डॉ आलोक रॉय ने कहा है कि रांची के मरीजों को भी यह सुविधा जल्द मिलेगी. मेडिका समूह के अस्पताल, पश्चिम बंगाल के अलावा, झारखंड, बिहार और असम में भी हैं. डॉ चेरियन ने कहा कि भारत में हर साल 25 हजार लोगों को लिवर ट्रांसप्लांट कराने की आवश्यकता होती है. जबकि मात्र 15 हजार लोग ही लिवर प्रत्यारोपण करा पाते है.
महानगर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मेडिका ग्रुप के चेयरमैन डॉ आलोक राय ने कहा कि साउथ एशियन लिवर इंस्टीट्यूट के सहयोग से महानगर में मेडिका हॉस्पिटल्स की ओर से मेडिका सेंटर फॉर लिवर डिजीज की शुरुआत की गयी है. उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में प्रत्यारोपण सहित लिवर की तमाम लिवर जनित बीमारियों के सटिक चिकित्सा करने के उदेश्य से इस उक्त सेंटर का उद्घाटन किया गया है.
सेंटर में लिवर, पैनक्रियाज और पित्त की थैली संबंधी बीमारियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है. मेडिका के लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम में जीवित एवं कडैवर (मृत) डोनर से लिए गये लिवर का प्रत्यारोपण किया जायेगा. उन्होंने कहा कि साउथ एशियन लिवर इंस्टीट्यूट के संस्थापक प्रो. डॉ टॉम चेरियन की देख-रेख में उक्त सेंटर को खोला गया है.
इन कारणों से होता है लिवर खराब
डॉ चेरियन के कहा कि लोग समझते है कि केवल अलकोहल लेने वाले लोगों का ही लिवर खराब हो सकता है. लेकिन लोगों की यह सोच लगत है. उन्होंने कहा कि अलकोहल के अलावा फैटी लिवर हेपेटाइटिस बी और सी के कारण भी लिवर खराब होता है. डॉक्टर ने कहा कि करीब 30 फीसदी मामलों में लिवर के खराब होने में फैटी लिवर जिम्मेवार होता है.
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