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पर्वतीय दलों ने दार्जिलिंग को केंद्र शासित क्षेत्र बनाने की मांग की

Updated at : 07 Aug 2019 1:47 AM (IST)
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पर्वतीय दलों ने दार्जिलिंग को केंद्र शासित क्षेत्र बनाने की मांग की

केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेड़कर से मिले सांसद राजू बिष्ट कोलकाता/दार्जिलिंग : अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में विभाजित करने के केंद्र के फैसले के बाद यहां के प्रमुख पर्वतीय दल चाहते हैं कि दार्जिलिंग को भी विधानसभा के साथ अलग केंद्र शासित क्षेत्र बनाया जाना चाहिए. दार्जिलिंग से […]

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केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेड़कर से मिले सांसद राजू बिष्ट

कोलकाता/दार्जिलिंग : अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में विभाजित करने के केंद्र के फैसले के बाद यहां के प्रमुख पर्वतीय दल चाहते हैं कि दार्जिलिंग को भी विधानसभा के साथ अलग केंद्र शासित क्षेत्र बनाया जाना चाहिए. दार्जिलिंग से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पर्वतीय क्षेत्र में ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ का पार्टी का वादा 2024 तक हकीकत बनेगा.
श्री बिष्ट ने मंगलवार को केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेड़कर से दिल्ली में मुलाकात कर कार्सियांग रेडियो स्टेशन के महत्व के बारे में जानकारी दी और रेडियो स्टेशन के एसडब्ल्यू ट्रांसमिटर को डीआरएम ट्रांसमिटर में बदलने की मांग की.
भाजपा का समर्थन करनेवाले बिमल गुरुंग के नेतृत्ववाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) के धड़े ने कहा कि भाजपा को पर्वतीय क्षेत्र में स्थायी राजनीतिक समाधान के अपने चुनावी वादे को पूरा करना चाहिए. अलग राज्य की मांग को लेकर कुछ दशकों से क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं.
गोजमुमो के महासचिव रोशन गिरि ने पार्टी प्रमुख गुरुंग का हवाला देते हुए कहा : हमलोग कई साल से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कर रहे हैं. भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इसके स्थायी राजनीतिक समाधान का वादा किया था. उन्होंने कहा : हमारा मानना है कि क्षेत्र को विधानसभा के साथ केंद्र शासित क्षेत्र बनाने का यह उपयुक्त समय है.
इस पर हमलोग जल्द आंदोलन शुरू करेंगे. जीएनएलएफ के नेता एनवी छेत्री ने कहा : अलग राज्य की मांग में लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन हमारा मानना है कि विधानसभा के साथ केंद्र शासित क्षेत्र सभी पक्षकारों को स्वीकार्य होगा. भाजपा सांसद बिष्ट ने कहा कि वह पर्वतीय दलों के विचारों का सम्मान करते हैं. इस संबंध में किसी समाधान पर पहुंचने से पहले सभी के विचार पर चर्चा की जायेगी. श्री बिष्ट ने कहा : मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि भाजपा स्थायी राजनीतिक समाधान के अपने वादे को पूरा करेगी. राज्य में भाजपा के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार दशकों पुरानी इस समस्या का समाधान करेगी.
तृणमूल का समर्थन करनेवाले धड़े ने विधानसभा के साथ केंद्र शासित क्षेत्र के मांग को खारिज किया और कहा कि भाजपा ने पिछले 10 साल से पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को ‘अलग राज्य का लॉलीपॉप दिखाकर’ मूर्ख बनाया है. तृणमूल का समर्थन करनेवाले गोजमुमो के धड़े के नेता बिनय तमांग ने कहा : न तो भाजपा और न ही बिमल गुरुंग यहां की जनता की समस्या को लेकर गंभीर हैं. वे सिर्फ अपने राजनीतिक मकसद के लिए उनका इस्तेमाल करना चाहते हैं. तृणमूल के वरिष्ठ नेता गौतम देब ने कहा कि वह राज्य के बंटवारे का कभी समर्थन नहीं करेंगे.
मंत्री ने कहा : भाजपा की नीति बांटो, तोड़ो और राज करो की रही है, लेकिन बंगाल में हम इसे कभी नहीं होने देंगे.
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