स्वयंसिद्ध योजना पूरे राज्य में शुरू करने का फैसला

Updated at : 10 Oct 2018 3:41 AM (IST)
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स्वयंसिद्ध योजना पूरे राज्य में शुरू करने का फैसला

कोलकाता : मानव तस्करी और बाल विवाह की घटनाओं की रोकथाम के लिये पश्चिम बंगाल सरकार ने दो जिलों में स्वयंसिद्ध योजना को शुरू किया था. उसकी सफलता को देखते हुए अब राज्य सरकार इस योजना को पूरे राज्य में शुरू करने का फैसला लिया है. ये बातें राज्य के शिशु व महिला विकास और […]

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कोलकाता : मानव तस्करी और बाल विवाह की घटनाओं की रोकथाम के लिये पश्चिम बंगाल सरकार ने दो जिलों में स्वयंसिद्ध योजना को शुरू किया था. उसकी सफलता को देखते हुए अब राज्य सरकार इस योजना को पूरे राज्य में शुरू करने का फैसला लिया है. ये बातें राज्य के शिशु व महिला विकास और सामाजिक कल्याण मंत्री डाॅ शशि पांजा ने मंगलवार को कहीं.
वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्वयंसिद्ध योजना जलपाईगुड़ी जिला और दक्षिण 24 परगना में शुरू किया था. दोनों जिलों में ही योजना काफी सफल रही. मंत्री ने कहा कि यही वजह है कि राज्य सरकार ने अब राज्य के सभी जिलों में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है. इस योजना के तहत युवा लड़के और लड़कियों को जानकारी और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाया जाता है. योजना के तहत विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में स्वयंसिद्ध ग्रुप तैयार किया गया. ग्रुप के सदस्योंं की उम्र 12 से 21 वर्ष के आसपास है.
चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी गठित ग्रुप की मॉनिटरिंग और दिशा-निर्देश करती है. योजना के तहत स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न इलाकों में घूम-घूमकर बच्चों के अधिकार, सुरक्षा और अन्य कानूनी पहलुओं के बारे में जागरूकता फैलाया गया. इसके अलावा तस्करी के जरिये देह व्यापार के धंधे में धकेल दी गयी लड़कियों के पुनर्वास को लेकर भी जागरूकता और प्रचार-प्रसार अभियान चलाया गया. मंत्री ने बताया कि नौकरी पाने के झांसे में राज्य की कई लड़कियों की अन्य राज्यों में तस्करी हो जाती है.
जिन जिलों में स्वयंसिद्ध योजना शुरू की गयी, वहां बाल व महिला तस्करी की घटनाओं में काफी कमी आयी है. ऐसी घटनाओं को रोकने और नजर रखने के लिये राज्य सरकार ने एक ड्राफ्ट बिल भी तैयार किया है. मंत्री डॉ शशि पांजा मानव तस्करी के खिलाफ राज्य की योजना के कार्यान्वयन पर आयोजित कार्यशाला में मौजूद थी.
कार्यशाला समाप्ति के बाद वे पत्रकारों से मुखातिब हुईं, जहां उन्होंने उपरोक्त बातें कही. सीआइडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्वयंसिद्ध योजना के लागू होने के बाद राज्य में करीब एक हजार लड़कियों को तस्करी होने से बचाया गया. अधिकारी के अनुसार योजना के कारण दो वर्षों में करीब तीन हजार तस्करों को गिरफ्तार करने में भी कामयाबी मिली है. इतना ही नहीं 500 स्कूलों में पढ़ने वाले करीब दो लाख विद्यार्थियों के बीच जागरूकता फैलाये जाना भी संभव हो पाया है.
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