कोलकाता : 30 प्रतिशत से भी कम सीटों पर दाखिलावाले इंजीनियरिंग कॉलेजों का अस्तित्व खतरे में
Author Prabhat khabar digital desk
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कुछ कॉलेजों को बहुत जल्दी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) की ओर से एक नोटिस जारी किया जा सकता है. जिन कॉलेजों में पिछले पांच सालों से 30 प्रतिशत से भी कम सीटों पर दाखिला हुआ है, उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. इस एकेडमिक सत्र में […]
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कुछ कॉलेजों को बहुत जल्दी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) की ओर से एक नोटिस जारी किया जा सकता है. जिन कॉलेजों में पिछले पांच सालों से 30 प्रतिशत से भी कम सीटों पर दाखिला हुआ है, उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
इस एकेडमिक सत्र में भी ऐसे कुछ कॉलेजों को चिन्हित किया गया है. शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार लगभग 80 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस एकेडमिक सत्र में प्रथम वर्ष (बीटेक) में 70 प्रतिशत से भी अधिक सीटें खाली रह गयी हैं. सीटे नहीं भरे जाने के कारण इन संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) द्वारा ही देश में इंजीनियरिंग शिक्षा पर नियंत्रण रखा जाता है. काउंसिल का यह नियम है कि किसी भी स्नातक कोर्स के प्रथम वर्ष में ही 30 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पायें तो इस कॉलेज को नोटिस मिल सकता है.
उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के लगभग 38 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में न्यूनतम सीटें भी नहीं भरी गयी हैं. इनमें से तीन कॉलेजों में इस साल स्नातक के प्रथम वर्ष में एक भी दाखिला नहीं हुआ है.
इसके अलावा कुछ ऐसे कॉलेज भी हैं, जहां बीटेक कोर्स के लिए प्रथम वर्ष में 10 छात्रों ने भी दाखिला नहीं लिया है. वहां 150 से लेकर 420 बीटेक सीटें खाली पड़ी हैं. इंजीनियरिंग के कुछ शिक्षकों का कहना है कि कुछ साल पहले तक इंजीनियरिंग डिग्री को रोजगार का माध्यम माना जाता था लेकिन अब तो संस्थानों में गुणवत्तापरक शिक्षा के अभाव में न तो छात्र दाखिला ले रहे हैं, न ही उन्हें पर्याप्त रोजगार मिल रहा है.
इंजीनियरिंग के हर क्षेत्र में बहुत तेजी से तकनीकी बदल रही है. कई कंपनियां अभी केवल उन्हीं संस्थानों से कर्मचारी लेती हैं, जहां इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार इंजीनियर तैयार किये जाते हैं. पश्चिम बंगाल ज्वाइंट एंट्रेंस परीक्षा बोर्ड द्वारा जून मध्य से ही काउंसिलिंग के कई चरण पूरे किये गये, ताकि निजी व सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में सीटें भरी जा सकें.
इसके बाद भी कई कॉलेजों में सीटें खाली रह गयी हैं, यह चिंता की बात है. जेइइ बोर्ड द्वारा डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से प्रत्येक कॉलेज को सीट अलॉट करने की प्रक्रिया जारी है, फिर भी सभी संस्थानों में सीटें खाली रहने से संस्थानों की मुश्किल बढ़ सकती है.
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