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पश्चिम बंगाल में 300 स्थानों पर अस्त्र पूजा करेगी विश्व हिंदू परिषद

Updated at : 29 Sep 2017 11:15 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल में 300 स्थानों पर अस्त्र पूजा करेगी विश्व हिंदू परिषद

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को मजबूत करने और हिंदुओं को एकजुट करने के प्रयास के तहत विश्व हिंदू परिषद (विहिप)शनिवारको विजयदशमी समारोह के मौके पर राज्य में 300 से अधिक स्थानों पर अस्त्र पूजा कार्यक्रम आयोजित करेगी. विहिप की राज्य इकाई के वरिष्ठ नेता सौरीश मुखर्जी ने कहा, ‘विजयदशमी का पर्व बुराई पर […]

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को मजबूत करने और हिंदुओं को एकजुट करने के प्रयास के तहत विश्व हिंदू परिषद (विहिप)शनिवारको विजयदशमी समारोह के मौके पर राज्य में 300 से अधिक स्थानों पर अस्त्र पूजा कार्यक्रम आयोजित करेगी.

विहिप की राज्य इकाई के वरिष्ठ नेता सौरीश मुखर्जी ने कहा, ‘विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. अस्त्र पूजा विजय दशमी समारोहों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हम राज्य के 300 से अधिक स्थानों पर अस्त्र पूजाओं का आयोजन करेंगे. कुछ स्थानों पर घरों के अंदर भी इसका आयोजन किया जायेगा, जहां दुर्गा प्रतिमा की पूजा की जाती है.’

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उन्होंने कहा, ‘हमारी राज्य में शस्त्र रैली निकालने की कोई योजना नहीं है. इस तरह के कार्यक्रम वर्षों से देश में आयोजित किये जाते हैं.’ विहिप के राज्य सचिव सचिंद्रनाथ सिंन्हा के अनुसार, इस वर्ष शस्त्र पूजा कार्यक्रम से राष्ट्र विरोधी और जेहादी तत्वों के खिलाफ राज्य के हिंदुओं की एकजुटता का संदेश दिया जायेगा.

सिन्हाने कहा, ‘अस्त्र पूजा के जरिये हम राष्ट्र विरोधी और जेहादी तत्वों के खिलाफ राज्य के हिंदुओं को एकजुट होने और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का संदेश देंगे. राज्य के हिंदुओं को एकजुट होना होगा और इन राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ खड़ा होना होगा.’

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उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी कहा गया था कि विहिप विजय दशमी के दिन इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती आयी है. इस बीच, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि लोगों के बीच विभाजन के किसी भी प्रयास को सहन नहीं किया जायेगा.

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त परकहाकि आरएसएस, विहिप और भारतीय जनता पार्टी पिछले कुछ वर्षों से सांप्रदायिक रूप से राज्य का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वे इसमें विफल रहे हैं. हरेक को धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने के किसी भी प्रयास को सहन नहीं किया जायेगा.

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