झारग्राम में हल्की बारिश ने बढ़ायी मुसीबत, डुलुंग नदी का फेयर वेदर ब्रिज डूबा, जामबनी–चिल्कीगढ़ सड़क संपर्क टूटा

Author Jitesh borkar|Edited by Mithilesh Jha
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झाड़ग्राम में हल्की बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, डुलुंग नदी का फेयर वेदर ब्रिज (कॉजवे) डूबा, जामबनी–चिल्कीगढ़ सड़क संपर्क टूटा | Prabhat Khabar Network

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झारग्राम में हल्की बारिश से डुलुंग नदी का कॉजवे डूब गया, जिससे जामबनी और चिल्कीगढ़ के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है. ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गयी है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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झारग्राम जिले में मानसून की हल्की बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. जामबनी प्रखंड के चिल्कीगढ़ स्थित डुलुंग नदी पर बने कॉजवे (छोटे पुल) पर बारिश के बाद नदी का पानी बहने लगा, जिससे जामबनी, चिल्कीगढ़ और गिधनी बाजार के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया.

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इससे हजारों ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है. लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, डुलुंग नदी पर बना यह कॉजवे हर वर्ष बरसात के मौसम में जलमग्न हो जाता है. इस बार भी मामूली बारिश के बाद ही नदी का जलस्तर बढ़ने से कॉजवे पूरी तरह पानी में डूब गया.

परिणामस्वरूप वाहनों की आवाजाही बंद हो गयी और लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना मुश्किल हो गया. कॉजवे के डूब जाने से क्षेत्र के लोगों को अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है.

इससे जहां यात्रा में अधिक समय लग रहा है, वहीं अतिरिक्त परिवहन खर्च भी उठाना पड़ रहा है. सबसे अधिक परेशानी मरीजों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक यात्रियों को हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि डुलुंग नदी पर एक स्थायी पुल बनाने की मांग कई वर्षों से की जा रही है.

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कई बार आश्वासन भी दिया गया, लेकिन आज तक पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका. इसका खामियाजा हर साल बरसात के दौरान स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है. क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और डुलुंग नदी पर जल्द से जल्द एक मजबूत एवं स्थायी पुल का निर्माण कराया जाये

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. फिलहाल, चिल्कीगढ़ और आसपास के गांवों के हजारों लोग प्रशासन की ओर से शीघ्र पहल और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाये बैठे हैं.


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