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राज्यपाल की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

Updated at : 16 Jul 2024 12:51 AM (IST)
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राज्यपाल की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री, दो नवनिर्वाचित विधायकों सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन तथा तृणमूल नेता कुणाल घोष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है.

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सीएम ने कहा-मेरी टिप्पणी में कुछ भी मानहानिकारक नहीं

संवाददाता, कोलकातामुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को अपने इस बयान पर दृढ़ता से कायम रहीं कि महिलाओं ने कोलकाता में राजभवन में जाने को लेकर भय जताया था. सुश्री बनर्जी ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे में एक अंतरिम आदेश के लिए राज्यपाल सीवी आनंद बोस की ओर से कलकत्ता हाइकोर्ट के समक्ष दाखिल याचिका का विरोध भी किया.

बोस ने मुख्यमंत्री, दो नवनिर्वाचित विधायकों सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन तथा तृणमूल नेता कुणाल घोष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है. सोमवार को मामले की सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

मुख्यमंत्री के वकील ने दावा किया कि आवेदन विचार योग्य नहीं है और साथ ही न्यायमूर्ति राव की अदालत के पास मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है. सीएम के वकील ने कहा कि दोनों विधायक शपथ कहां लेंगे, इसको लेकर गतिरोध पर उनका बयान भी मानहानिकारक नहीं था. राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सहित अन्य तृणमूल नेताओं पर उनके खिलाफ सम्मान को ठेस पहुंचानेवाले बयान से दूर रहने के लिए अदालत में आवेदन किया था.

विधायक रेयात हुसैन के वकील ने कहा कि राज्यपाल द्वारा दायर मामला स्वीकार करने योग्य नहीं है. विधायक सायंतिका बंद्योपाध्याय के वकील ने कहा कि राजभवन में कार्यरत एक महिला ने जो आरोप लगाया था, उसी परिपेक्ष्य में विधायक ने अपनी आशंका जाहिर की थी. कुणाल घोष के वकील ने कहा कि घोष ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की थी जिससे राज्यपाल का मानहानि हुई है.

हाइकोर्ट में क्या कहा मुख्यमंत्री के वकील ने

सुश्री बनर्जी के वकील एसएन मुखर्जी ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव के समक्ष दलील दी कि उनकी (ममता) टिप्पणी जनहित के मुद्दों पर एक निष्पक्ष टिप्पणी थी और मानहानिकारक नहीं थी. मुख्यमंत्री के अपने बयान पर कायम रहने की बात कहते हुए मुखर्जी ने दलील दी कि उन्होंने केवल राजभवन में कुछ कथित गतिविधियों पर महिलाओं की आशंकाओं को दोहराया था. मुखर्जी ने कहा कि वह हलफनामे में उन महिलाओं के नाम बताने को तैयार हैं, जिन्होंने ऐसी आशंका जाहिर की है. अंतरिम आदेश के अनुरोध पर न्यायमूर्ति राव की अदालत में बहस पूरी हो गयी और इस पर आदेश बाद में दिया जायेगा.

क्या कहा राज्यपाल के अधिवक्ता ने

बोस की ओर से पेश हुए वकील धीरज त्रिवेदी ने कहा कि यह मुद्दा राज्यपाल द्वारा दो नवनिर्वाचित तृणमूल विधायकों सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन सरकार को राजभवन में शपथ लेने के लिए आमंत्रित करने से शुरू हुआ. त्रिवेदी ने कहा कि दोनों ने विधानसभा अध्यक्ष या राज्यपाल से विधानसभा में शपथ लेने के लिए उन्हें एक पत्र लिखा था. उन्होंने कहा कि इसमें किसी आशंका या भय का उल्लेख नहीं था जैसा कि बाद में कथित तौर पर कहा गया था. मुख्यमंत्री के अलावा, बोस ने दो विधायकों और टीएमसी नेता कुणाल घोष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है.

राज्यपाल क्यों पहुंचे हैं हाइकोर्ट

राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मुख्यमंत्री, दो नवनिर्वाचित विधायकों सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन तथा तृणमूल नेता कुणाल घोष के खिलाफ हाइकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व में कहा था कि महिलाओं ने कोलकाता में राजभवन में जाने को लेकर भय जताया था. गौरतलब है कि दो मई को राजभवन में कार्यरत एक संविदा महिला कर्मचारी ने बोस के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने एक जांच शुरू की थी. संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत किसी राज्यपाल के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती.

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