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मंच की गर्जना, रानीगंज का नहीं मिटने देंगे अस्तित्व

Updated at : 10 Jan 2026 1:49 AM (IST)
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मंच की गर्जना, रानीगंज का नहीं मिटने देंगे अस्तित्व

कुमार बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम के पास आयोजित एक जनसभा में वक्ताओं ने प्रशासन और ईसीएल की नीतियों को रानीगंज के अस्तित्व को समाप्त करने की एक गहरी साजिश करार दिया.

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कुमार बाजार की जनसभा में गूंजा आंदोलन का शंखनाद निर्माण पर रोक व विस्थापन के मुद्दे पर प्रशासन को घेरा

रानीगंज. शहर के वजूद पर मंडराते खतरों और नए निर्माण कार्यों पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ ””””रानीगंज बचाओ मंच”””” ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है. कुमार बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम के पास आयोजित एक जनसभा में वक्ताओं ने प्रशासन और ईसीएल की नीतियों को रानीगंज के अस्तित्व को समाप्त करने की एक गहरी साजिश करार दिया.

निर्माण अनुमति ना मिलना शहर के लिए ””””डेथ वॉरंट””””

सभा को संबोधित करते हुए मंच के जॉइंट कन्वीनर गौतम घटक ने कहा कि रानीगंज इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. उन्होंने प्रशासनिक जटिलताओं पर प्रहार करते हुए कहा, “अड्डा द्वारा प्लान सैंक्शन न किए जाने के कारण नगर निगम से अंतिम अनुमति नहीं मिल रही है।.यह केवल एक तकनीकी रोक नहीं, बल्कि रानीगंज के विकास को रोकने का सुनियोजित प्रयास है.इसी के खिलाफ ””””रानीगंज बचाओ मंच”””” का जन्म हुआ है और हम अंतिम सांस तक शहर की रक्षा के लिए लड़ेंगे.

कोयला खनन और जल संकट की चेतावनी

सुभाष स्वदेश भावना के अध्यक्ष गोपाल आचार्य ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि रानीगंज में कोयला खनन सदियों से हो रहा है, लेकिन पहले वैज्ञानिक तरीके से खुदाई होती थी. उन्होंने वर्तमान खनन नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नारायणकुड़ी में दामोदर नदी के पास 300 फीट गहरी ओपन कास्ट माइनिंग की जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे शहर के लिए भीषण जल संकट पैदा कर देगी. उन्होंने 5 साल पुराने विस्थापन के नोटिसों का जिक्र करते हुए कहा कि रानीगंज के लोगों को लाउदोहा भेजने की कोशिशें शहर को उजाड़ने की साजिश का हिस्सा हैं. ‘क्या कोयले के लिए कोलकाता व बर्दवान भी होंगे खाली ?’

मंच के सदस्य डॉ एसके बोस ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा, “सर्वे बताते हैं कि जिस गुणवत्ता का कोयला रानीगंज में है, वैसा ही कोयला कुल्टी से लेकर कोलकाता और वर्धमान तक फैला है. अगर कोयला ही आधार है, तो क्या कोलकाता में कोल इंडिया भवन को तोड़कर शहर खाली कराया जाएगा? फिर बार-बार रानीगंज पर ही यह कुदृष्टि क्यों. सड़क पर उतरने का आह्वान

सभा के अंत में वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि प्रशासन ने निर्माण कार्यों से प्रतिबंध नहीं हटाया और शहर को असुरक्षित घोषित करने का खेल बंद नहीं किया, तो आंदोलन उग्र होगा। मंच ने आह्वान किया कि शहरवासियों को अपनी जमीन और पहचान बचाने के लिए सड़कों पर उतरना होगा और जरूरत पड़ने पर चक्का जाम भी किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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