मां भद्रकाली और सत्य पीर बाबा की एक ही मंदिर में पूजा, पांच सदियों से कायम है परंपरा
Updated at : 20 Oct 2025 1:20 AM (IST)
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धार्मिक एकता की मिसाल बना पुरुलिया का हिरबहाल गांव
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हंसराज सिंह, पुरुलिया
जिले के 2 नंबर ब्लॉक का छोटा-सा गांव हिरबहाल धार्मिक सौहार्द और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. करीब पांच सौ वर्षों से यह गांव हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच एकता का प्रतीक बना हुआ है. यहां एक ही मंदिर में मां भद्रकाली और सत्य पीर बाबा की एक साथ पूजा-अर्चना की जाती है. स्थानीय लोग इसे “मां भद्रकाली और सत्य पीर का मंदिर” के नाम से जानते हैं.बाउरी समाज निभा रहा परंपरा का दायित्व
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पूजा करने वाले पुजारी ब्राह्मण नहीं, बल्कि बाउरी समाज से आते हैं. वर्तमान पुजारी तपन बावड़ी ने बताया कि उनके परिवार के लोग पीढ़ियों से इस परंपरा को निभा रहे हैं. काली पूजा के समय मंदिर का माहौल बेहद उत्सवमय हो जाता है. आज भी यहां बली प्रथा प्रचलित है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग मिलकर बकरे और मुर्गे की बली देते हैं और मां काली को चढ़ावा चढ़ाते हैं.कथा के अनुसार ऐसे शुरू हुई संयुक्त उपासना की परंपरा
कथाओं के अनुसार लगभग पांच शताब्दी पूर्व एक सन्यासी ने इसी स्थान पर तपस्या करते हुए मां काली का स्वप्नादेश पाया था और यहीं पूजा आरंभ की. कुछ समय बाद एक मुस्लिम पीर बाबा वहां पहुंचे और उन्होंने सन्यासी को सलाह दी कि वे काली मंदिर में ‘अल्लाह’ की उपासना भी करें. पहले सन्यासी ने संकोच किया, पर पीर बाबा ने समझाया कि वे अल्लाह की पूजा ‘सत्यनारायण’ के रूप में कर सकते हैं. इसके बाद से मंदिर में मां काली और सत्य पीर बाबा की संयुक्त उपासना होती आ रही है. यह परंपरा आज भी धार्मिक भेदभाव से परे, एकता और आस्था की अद्भुत मिसाल बनी हुई है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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