जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों का होगा इलाज

Updated at : 20 Feb 2020 1:24 AM (IST)
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जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों का होगा इलाज

जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी ने बुधवार को किया चिकित्सा का शुभारंभ दुर्गापुर महकमा अस्पताल में भी यह सुविधा प्रदान करने के लिए हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया प्रयासरत आसनसोल : हीमोफीलिया के मरीजों को चिकित्सा मुहैया कराने का कार्य बुधवार से जिला अस्पताल में आरम्भ हुआ. जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) देबाशीष […]

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जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी ने बुधवार को किया चिकित्सा का शुभारंभ

दुर्गापुर महकमा अस्पताल में भी यह सुविधा प्रदान करने के लिए हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया प्रयासरत
आसनसोल : हीमोफीलिया के मरीजों को चिकित्सा मुहैया कराने का कार्य बुधवार से जिला अस्पताल में आरम्भ हुआ. जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) देबाशीष हालदार ने इसका शुभारंभ किया. पश्चिम बर्दवान जिले में हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या 64 हैं. इनका इलाज पहले बर्दवान मेडिकल कॉलेज में होता था. आसनसोल में इसकी चिकित्सा आरम्भ होने से जिले के मरीजों के लिए काफी सुविधा हो गयी. बुधवार को पांच मरीजों का इलाज किया गया.
उन्हें एन्टीहिमोफ्लीक फैक्टर का इंजेक्शन दिया गया. मौके पर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. निखिलचन्द्र दास, सहायक अधीक्षक डॉ. कंकन राय, डॉ. भाष्कर हाजरा, डॉ. संजीव चटर्जी, डॉ. निर्झर माजी गैर सरकारी संगठन आदि उपस्थित थे. हीमोफीलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया दुर्गापुर चैप्टर के उपाध्यक्ष अजय राय, सचिव पिनाकी बनर्जी, महिला समूह की संयोजक सोमा घोष आदि उपस्थित थीं.
सीएमओएच श्री हलदार ने बताया हिमोफिलिया के रोगियों को प्रोटीन फैक्टर आठ तथा प्रोटीन फैक्टर नौ देकर चिकित्सा का कार्य आसनसोल जिला अस्पताल में आरम्भ हुआ. यह जिला अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि है. हीमोफीलिया की चिकित्सा दो पद्धति से होती है, प्रोफाइलेक्टिक और अपातकालीन, जिला अस्पातल में आपालकालीन चिकित्सा पद्धति को आरम्भ किया गया हैं. प्रोफाईलेक्टिक पद्धति शुरू करने के लिए प्रयास किया जा रहा है.
इसके लिये चिकित्सक व नर्सो के साथ साथ उपकरणों की भी आवश्यकता होगी. आगामी दिनों में हिमोफिलिया व थेलेसिमिया के लिये अलग यूनिट स्थापित करने को लेकर कार्य चल रहा है. अधीक्षक डॉ. दास ने बताया कि थेलेसिमिया और हीमोफीलिया के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में इन्हें चिकित्सा सेवा देने को लेकर आठ माह पूर्व जिला अस्पताल के चिकित्सकों की बैठक हुई थी. जिसमें थेलेसिमिया और हीमोफीलिया बीमारी के इलाज के लिए अलग यूनिट विभिन्न स्थानों में करने का निर्णय लिया गया था.
जिसके तहत जिला अस्पताल में यह कार्य आरंभ हुआ.जिले में थेलेसिमिया के मरीजों की संख्या ढाई सौ है. जिन्हें जिला अस्पताल से रक्त मुहैया कराया जाता रहा है. हीमोफीलिया के मरीजों के इलाज के लिए बुधवार से कार्य आरंभ हुआ. डॉ. दास ने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज के लिए चिकित्सकों विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.
जिसमें गैर सरकारी संगठन दुर्गापुर चैप्टर ने सहयोग किया. आर्थिक सहयोग के साथ साथ सीएमओएच डॉ. हालदार ने फैक्टर खरीदने में काफी मदद की. हीमोफीलिया एक जन्मजात रोग हैं. पुरुष इसके मरीज और महिलाएं इसकी बाहक होती हैं. यह एक्स क्रोमोजोम से होता हैं. इस बीमारी में प्रोटीन फैक्टर की कमी से शरीर के किसी हिस्से से रक्तस्राव होने लगता हैं.
कुछ रोगियो को सोनोग्राफी के लिये भेजा गया हैं. बुधवार को पांच मरीजों का इलाज किया गया.
दुर्गापुर चैप्टर के उपाध्यक्ष श्री राय ने बताया कि पुरुलिया जिला अस्पताल में भी इसकी चिकित्सा कुछ ही दिनों बाद आरम्भ हो जाएगी. दुर्गापुर महकमा अस्पताल में इसकी चिकित्सा आरम्भ करने के लिए प्रयास किया जा रहा है. इसमें रक्तस्राव होने पर मरीज को जल्द से जल्द एंटी हिमोफ्लीक इंजेक्शन देनी होती है. यह इंजेक्शन देने में देर होने से रक्तस्राव के कारण मरीज की मौत हो सकती है. इसलिए चिकित्सा व्यवस्था हर जगह आरम्भ होने से मरीजों की मौत से बचाया जा सकेगा.
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