तालाबों की रखवाली और भूमिगत जल स्तर बढ़ाने को लेकर जिलाशासक ने की बैठक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jan 2020 1:05 AM
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जिले में 21 तालाबों को नीलामी के लिए किया गया चिन्हित एसएचजी, मत्स्य पालन समूह और कोऑपरेटिव को पहली प्राथमिकता कांकसा में तालाबों की भराई पर अधिकारियों को जांच का आदेश आसनसोल : जिलाशासक शशांक सेठी ने बुधवार को जिले में निविदा के लिए चिन्हित 21 तालाबों की नीलामी और अबैध रूप से हो रही […]
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जिले में 21 तालाबों को नीलामी के लिए किया गया चिन्हित
एसएचजी, मत्स्य पालन समूह और कोऑपरेटिव को पहली प्राथमिकता
कांकसा में तालाबों की भराई पर अधिकारियों को जांच का आदेश
आसनसोल : जिलाशासक शशांक सेठी ने बुधवार को जिले में निविदा के लिए चिन्हित 21 तालाबों की नीलामी और अबैध रूप से हो रही तालाबों की भराई के मुद्दे को लेकर जल निकाय प्रबंधन पर भूमि और मत्स्य विभाग के आधिकरियों के साथ जिला मुख्यालय में बैठक की. जिले के कांकसा प्रखण्ड में सबसे अधिक तालाब भराई की शिकायत पर अधिकारियों को जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
सनद रहे कि जिले की आवादी बढ़ने और भूमिगत पानी का लगातार दोहन होने से इलाके का जल स्तर काफी नीचे चला गया है. तालाबों की लगातार भराई होने से इलाके में जल संकट चरम पर है.
गर्मी के दिनों में पूरे जिले में बढ़ते जल संकट को रोकने और भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने के लिए पिछले दो वर्षों से जिलाशासक लगातार प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने अबैध रूप से तालाबों की भराई पर अंकुश लगाने के तहत कड़ी कार्रवाई आरम्भ की है. इसके साथ-साथ सरकारी जमीन पर स्थित तालाबों की भराई नहीं हो, उससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और भूमिगत जल स्तर में सुधार हो इन तीनों कारणों को एक साथ साधने के लिए जिले में पहली बार सरकारी तालाबों की नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई है. जिसे लेकर बुधवार को बैठक की हुई.
जिलाशासक श्री सेठी ने बताया कि जिले में नीलामी के लिए कुल 21 तालाबों को चिन्हित किया गया है. निविदा में पहली प्राथमिकता स्वयं सहायता समूह, मछली पालन समूह और कोऑपरेटिव सोसाइटी को दी जाएगी. इनमें से यदि कोई नीलामी की प्रक्रिया में भाग नहीं लेता है तो फिर साधारण वगक्ति या अन्य संस्था को तालाब दिया जाएगा. जिला प्रशासन पांच एकड़ से अधिक जमीन पर फैले तालाबों की ही नीलामी कर सकती. इससे कम जमीन पर फैले तालाब की नीलामी ग्राम पंचायत स्तर से होता है.
ग्राम पंचायतों से भी उनके अधीन तालाबों की सूची मांगी गई है. कितने तालाब की नीलामी हुई है, कितने खाली पड़े हैं, सभी की सूची तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है. अविभाजित बर्दवान जिला से भी डेटा लेकर मिलान किया जाएगा कि पश्चिम बर्दवान जिला बनने के बाद उसके हिस्से में कितने तालाब आए. मत्स्य विभाग और भूमि विभाग के आधिकारियों को निर्देश दिया गया कि तालाबों की सूची मिलान करके उसे रिकार्ड में दर्ज करें.
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