जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सीधे करेंगे बूथ अध्यक्ष का चुनाव
Updated at : 03 Sep 2019 1:46 AM (IST)
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जिले के सभी बूथों से एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्षों की सूची देनी होगी दो माह में पहले प्रखंड अध्यक्ष, संबंधित विधायक की होती थी इसमें निर्णायक भूमिका जमीनी स्तर पर गुटबाजी, उपेक्षा समाप्त करने के लिए नेतृत्व ने लिया निर्णय आसनसोल : आगामी विधानसभा चुनाव तथा अन्य चुनावों के मद्देनजर बूथ स्तरीय कमेटी गठन का […]
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जिले के सभी बूथों से एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्षों की सूची देनी होगी दो माह में
पहले प्रखंड अध्यक्ष, संबंधित विधायक की होती थी इसमें निर्णायक भूमिका
जमीनी स्तर पर गुटबाजी, उपेक्षा समाप्त करने के लिए नेतृत्व ने लिया निर्णय
आसनसोल : आगामी विधानसभा चुनाव तथा अन्य चुनावों के मद्देनजर बूथ स्तरीय कमेटी गठन का दायित्व तृणमूल नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष को देने का निर्णय सोमवार को लिया.
इससे पश्चिम बर्दवान जिलाध्यक्ष सह मेयर जितेन्द्र तिवारी को और अधिक दायित्व तथा अधिकार मिल गया है. पहले बूथ स्तरीय कमेटी चुनने का कार्य पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष करते थे. उसकी अनुशंसा स्थानीय विधायक के माध्यम से पार्टी हाई कमान तक जाती थी. इसके बाद उसकी मंजूरी मिलती थी. जिलाध्यक्ष का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता था. निर्णय के अनुसार आगामी दो माह में सभी बूथों पर अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्षों की सूची पार्टी नेतृत्व को भेजनी होगी.
इस निर्णय के बाद जिला अध्यक्ष अपने-अपने जिले में बूथ स्तरीय कमेटी गठन के लिए कार्य में जुट गये हैं.वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने तथा भाजपा के मजबूत शक्ति के रूप में उभरने से तृणमूल पार्टी हाई कमान अपनी रणनीति में लगातार बदलाव कर रहा है. विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद निर्णय लिये जा रहे हैं. राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत कुमार की सलाह भी महत्वपूर्ण हो रही है.
सोमवार को कोलकाता में हुई पार्टी की बैठक में बूथ कमेटी पर चर्चा की गई तथा जिलाध्यक्षों को और अधिक अधिकार तथा जिम्मेवार बनाया गया. राजनैतिक पार्टी की सांगठनिक ताकत ग्रासरुट की मजबूती से ही मजबूत होती है. ग्रासरूट पर पार्टी को मजबूत करने का मुख्य कार्य बूथ स्तरीय कमेटी के सदस्यों का होता है. इस कमेटी को चुनने का अधिकार पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष को था. प्रखंड अध्यक्ष जिसे भी चुनते थे. स्थानीय विधायक उस नाम की अनुशंसा कर आलाकमान को भेज देते है.
आलाकमान से उसपर मुहर लग जाती थी. इससे गुटबाजी की संभावना प्रबल होती थी. बूथ स्तर पर यदि कोई अच्छा, समर्पित पार्टी कर्मी है और प्रखंड अध्यक्ष के साथ उसके मधुर संबंध नहीं है तो उस व्यक्ति को बूथ कमेटी से दरकिनार करके पार्टी अध्यक्ष अपने मनपसंद व्यक्ति को कमेटी में शामिल कर लेते थे. इससे बूथ स्तर पर गुटबाजी बढ़ जाती थी और चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर हो जाता है. पार्टी आलाकमान ने बूथ स्तरीय कमेटी चुनने का दायित्व जिलाध्यक्ष को दे दिया. इससे ग्रासरूट पर अच्छे से अच्छे लोग कमेटी में आ सकेंगे और गुटबाजी समाप्त हो जाएगी.
संसदीय चुनाव के बाद ही पार्टी नेतृत्व मे मेयर सह विधायक श्री तिवारी को जिलाध्यक्ष का भी दायित्व दिया. इसके बाद से उनकी सक्रियता काफी बढ़ गई है. हालांकि अभी तक नई जिला कमेटी का गठन नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेवारी मिली है, उसका पालन किया जायेगा. बूथ स्तरीय पार्टी कर्मियों की समीक्षा की जायेगी तथा उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी जायेगी. उन्होंने कहा कि इसके लिए वे संबंधित पदाधिकारियों तथा पार्टी विधायकों की राय लेंगे. सनद रहे कि जिले की नौ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच पर तृणमूल, तीन पर माकपा तथा एक पर कांग्रेस का कब्जा था. कांग्रेस विधायक विश्वनाथ पड़ियाल तृणमूल में आ गये थे. इस कारण तृणमूल के छह विधायक हैं. रानीगंज, जामुड़िया तथा दुर्गापुर पूर्व पर माकपा काबिज है.
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