कोयला उद्योग में लौट रहा कंपनी युग:आरसी

अंडाल : पूर्व सांसद सह कोलियरी मजदूर सभा (एटक) के महासचिव आरसी सिंह ने कहा कि वर्षों तक चली लंबी लड़ाई और सैकड़ों श्रमिकों के बलिदान के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 1973 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था. केंद्र की भाजपा सरकार पुनः उन खदानों को निजी हाथों में सौंप रही है. श्रमिकों […]
अंडाल : पूर्व सांसद सह कोलियरी मजदूर सभा (एटक) के महासचिव आरसी सिंह ने कहा कि वर्षों तक चली लंबी लड़ाई और सैकड़ों श्रमिकों के बलिदान के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 1973 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था. केंद्र की भाजपा सरकार पुनः उन खदानों को निजी हाथों में सौंप रही है. श्रमिकों के अधिकार का हनन हो रहा है.श्रम कानून में संशोधन कर सरकार श्रमिकों के अधिकार को कम करने जा रही है. इसके खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन करनी होगी. वे गुरूवार को सिदुली रीक्रियशन क्लब में शहीद दिवस पर आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे. इसके पहले कोलियरी इलाके में रैली निकाली गई.
यूनियन के अध्यक्ष प्रभात राय, उपाध्यक्ष जीएस ओझा, सिनचन बनर्जी, अनिल सिंह, शैलेन्द्र सिंह, रमेश सिंह, जोगिंदर प्रसाद, गुरुदास चक्रबर्ती, केदारनाथ पांडे, हरिशचन्द्र यादव, ओमप्रकाश तिवारी, अनिल पासवान, दिलीपदास मानिकपुरी, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के राज्य परिषद के सचिव तापस सिन्हा, जिला परिषद सचिव राजू राम, पश्चिम बंग महिला समिति की नेत्री मंजू बोस, अदालती हरिजन आदि उपस्थित थे.सनद रहे कि एक अगस्त 1971 को सिदुली कोलियरी में कंपनी के गुंडों के हाथों जयश्री यादव और दीपचंद जायसवारा की मौत हुई थी. हरि राय को गोली लगने से उनका एक हाथ काटना पड़ा था.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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