माध्यमिक टेस्ट पेपर पुस्तिका में हिंदी माध्यम छात्रों की उपेक्षा , भौतिक विज्ञान पेपर सिर्फ बांग्ला, अंग्रेजी में

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jan 2019 6:32 AM

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आसनसोल : पश्चिम बंगाल में औसतन हर साल माध्यमिक की परीक्षा में शामिल होनेवाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है. पिछली बार माध्यमिक परीक्षा में करीब 11 लाख परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था. जिसमें 50 हजार से अधिक हिंदी माध्यम के परीक्षार्थी थे. इसी तरह से इस वर्ष करीब 55 हजार से ज्यादा ही […]

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आसनसोल : पश्चिम बंगाल में औसतन हर साल माध्यमिक की परीक्षा में शामिल होनेवाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है. पिछली बार माध्यमिक परीक्षा में करीब 11 लाख परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था. जिसमें 50 हजार से अधिक हिंदी माध्यम के परीक्षार्थी थे.

इसी तरह से इस वर्ष करीब 55 हजार से ज्यादा ही विद्यार्थी हिंदी माध्यम के हैं. ऐसे में वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (पश्चिम बंद मध्य शिक्षा परिषद) की ओर से वर्ष 2019 में माध्यमिक की परीक्षा देनेवाले सभी विद्यार्थियों के लिए तैयार किये गये टेस्ट पेपर 2018-19 की पुस्तकें बांटी गई हैं.

लेकिन इस पुस्तिका में हिंदी माध्यम को नजरदांज करने व उपेक्षा करते पाया गया है. पुस्तिकाओं में अधिकांश पेपर अंग्रेजी व बांग्ला में तैयार किये गये हैं. जिससे विद्यार्थियों के लिए परेशानी शुरू हो गई है. हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को तैयारी करने में दिक्कतें हो रही हैं.

भौतिक विज्ञान में एक भी पेपर हिंदी में नहीं

टेस्ट पेपर 2018-19 की पुस्तिका में भौतिक विज्ञान विषय के एक भी पेपर हिंदी में नहीं हैं. लगभग हर विषय के 20 से 30 पेपर सेट किये गये हैं लेकिन अधिकांश बांग्ला और अंग्रेजी में ही उपलब्ध हैं.

अन्य विषयों को देखने पर पाया गया कि इतिहास, भूगोल, विज्ञान और गणित जैसे विषयों के हिंदी में गिने-चुने ही एक-दो पेपर ही पुस्तिका में हैं. ऐसे में क्या हिंदी माध्यम के बच्चे एक-दो पेपर को हल करके माध्यमिक की परीक्षा में बेहतर नंबर ला पायेंगे? यह अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है.

जो हैं वह भी नाम मात्र के

लैंग्वेज (भाषा) विषयों को छोड़ कर इतिहास, व्ज्ञान, भौतिक विज्ञान, भूगोल और गणित जैसे विषयों की बात करें तो टेस्ट पेपर में नाम मात्र के ही हिंदी में कुछेक पेपर हैं. इतिहास के हिंदी में मात्र एक पेपर, भूगोल के एक पेपर, लाइफ साइंस के भी एक ही पेपर हैं. बाकी पेपर है भी तो अंग्रेजी और बांग्ला में हैं.

क्या कहते हैं शिक्षक

शिक्षकों का कहना है कि राज्य सरकार खर्च करके पुस्तिका छपा कर स्कूलों में बांटती है. लेकिन यह खर्च सही दिशा में नहीं हुआ, क्योंकि जिस तरह से बांग्ला और अंग्रेजी में पेपर हैं, उसी तरह से हिंदी में भी टेस्ट पेपर होने चाहिए थे.

इस टेस्ट पेपर पुस्तिका से हिंदी माध्यम का नहीं, बल्कि बांग्ला माध्यम के बच्चों को ही फायदा होगा. सरकार को इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह सौ प्रतिशत सही बात है कि हिंदी माध्यम के बच्चों की उपेक्षा हुई है.

सरकार ध्यान नहीं दे रही है. पश्चिम बंगाल सरकार क चाहिए कि हिंदी भाषियों पर भी ध्यान दे. हिंदी माध्यम के माध्यमिक विद्यार्थी भी काफी अधिक हैं. टेस्ट पेपर उनकी भाषा में रहेगा तो उन्हें सुविधा होगी. वैसे टेस्ट पेपर बांटने से क्या फायदा, जिससे बच्चे तैयारी ही नहीं कर पायेंगे.

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