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अमेरिका और कनाडा भेजते थे ड्रग्स, गिरोह के तीन गिरफ्तार

Updated at : 28 Sep 2018 4:16 AM (IST)
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अमेरिका और कनाडा भेजते थे ड्रग्स, गिरोह के तीन गिरफ्तार

कोलकाता : नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कोलकाता जोनल यूनिट और दिल्ली एनसीबी की टीम ने संयुक्त रूप से एक बड़े ड्रग्स तस्कर गिरोह का पर्दाफाश कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरोह कोलकाता में कॉल सेंटर के नाम पर अवैध तरीके से इंटरनेट फार्मेसी चला रहा था. आरोपी ड्रग्स के नाम नशीली दवाएं […]

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कोलकाता : नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कोलकाता जोनल यूनिट और दिल्ली एनसीबी की टीम ने संयुक्त रूप से एक बड़े ड्रग्स तस्कर गिरोह का पर्दाफाश कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरोह कोलकाता में कॉल सेंटर के नाम पर अवैध तरीके से इंटरनेट फार्मेसी चला रहा था. आरोपी ड्रग्स के नाम नशीली दवाएं अमेरिका और कनाडा भेजते थे. उनके पास से छह अलग-अलग तरह की कुल 3161 नशीली दवाएं जब्त की गयी हैं. जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये है. जब्त ये नशीली दवाएं भारत में प्रतिबंधित नहीं होते हुए भी अमेरिका और कनाडा में ड्रग्स के रूप में प्रतिबंधित हैं.

एनसीबी कोलकाता जोनल यूनिट के निदेशक दिलीप श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में गणेश पुन, सुनील अग्रवाल और सेलमेंट फिलिप्स को गिरफ्तार किया गया है. गणेश कोलकाता के महेशतल्ला के ग्रीनफील्ड सिटी और सुनील श्यामनगर का रहने वाला है. सेलमेंट फार्मेसी का मालिक है. गिरोह पोद्दारनगर में इंटरनेट फार्मेसी चलाता था. विभिन्न तरह की दवाओं को इंटरनेट के जरिये संपर्क कर डिमांड मुताबिक भेजा जाता था. इस सेंटर में नशीली दवाएं मूल रूप से खुदरा व्यापारियों और वेंडरों के माध्यम से आता था.

कैसे दबोचे गये तीनों : एनसीबी के मुताबिक, 24 सितंबर को एक सूचना के आधार पर उत्तर 24 परगना के श्यामनगर में छापेमारी की गयी. वहां से सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ के बाद गरफा थाना क्षेत्र इलाके में ड्रीम एडवेंट सर्विस कॉल सेंटर का पता चला. फिर वहां से अधिकारियों ने गणेश और सेलमेंट को गिरफ्तार किया. प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह दिन में कॉल सेंटर चलाता था और रात में अमेरिका और कनाडा में नशीली दवा सप्लाई करने का अॉर्डर लिया करता था.
लेते थे पोस्ट ऑफिस और कूरियर का सहारा : अमेरिका और कनाडा में प्रतिबंधित होने के कारण नशीली दवाओं को वहां तक सप्लाई करने के लिए यह गिरोह मूल रूप से पोस्ट ऑफिस और कूरियर का सहारा लेता था. नशीली दवाएं पोस्ट ऑफिसर व कूरियर के माध्यम से भेजी जाती थीं.
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश: श्री श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार तीनों से पूछताछ की जा रही है. यहां इन दवाओं की कीमत बहुत कम है लेकिन अमेरिका और कनाडा में एक टेबलेट की कीमत दस डॉलर के बराबर है. इस गिरोह में और भी कोई शामिल है या नहीं? इसका पता लगाया जा रहा है.
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