परिवार की बेरुखी से मानसिक रोगी बना निजामुद्दीन

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हावड़ा: आठ जनवरी 2005 को गोलाबाड़ी थाना अंतर्गत पिलखाना के करबला मैदान के पास हमेशा की तरह लोगों की भीड़ थी. इसी बीच दो किशोरों के बीच किसी बात को लेकर बहस लोगों ने सुनी. इससे पहले की लोगों को कुछ समझ में आता, एक किशोर ने दूसरे के गले में उस्तुरा मार दिया. अस्पताल […]

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हावड़ा: आठ जनवरी 2005 को गोलाबाड़ी थाना अंतर्गत पिलखाना के करबला मैदान के पास हमेशा की तरह लोगों की भीड़ थी. इसी बीच दो किशोरों के बीच किसी बात को लेकर बहस लोगों ने सुनी. इससे पहले की लोगों को कुछ समझ में आता, एक किशोर ने दूसरे के गले में उस्तुरा मार दिया.

अस्पताल में जख्मी किशोर हसीबुल कयूम ने दम तोड़ दिया. उस्तुरा मारनेवाला किशोर कोई और नहीं, बल्कि शेख निजामुद्दीन था. सोमवार सुबह उसने ही कोलकाता के प्रेसिडेंसी जेल में हैप्पी सिंह को मौत के घाट उतार दिया.

गिरफ्तार हुआ निजामुद्दीन
पुलिस ने निजामुद्दीन सहित जाकीर व सबीरुद्दीन को इस कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया. मामले की सुनवाई हावड़ा के प्रथम त्वरित न्यायालय में शुरू हुई. 90 दिनों तक पुलिस व न्यायिक हिरासत में रहने के बाद तीनों जमानत पर रिहा हुए, लेकिन अदालत में सुनवाई चलती रही.

पांच साल बाद दोषी करार
पांच साल तक प्रथम त्वरित न्यायालय में सुनवाई चलने के दौरान आखिरकार अदालत ने शेख निजामुद्दीन को दोषी करार देते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनायी, जबकि इस मामले में बाकी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. परिजनों के मुताबिक, घटना जब घटी थी, उस समय निजामुद्दीन नाबालिग था. हालांकि अदालत में नाबालिग होने का कोई रिकॉर्ड वे जमा नहीं कर सके थे. निजामुद्दीन को पहले हावड़ा जेल व बाद में प्रेसिडेंसी जेल में भेज दिया गया.

पैरोल पर रिहा हुआ था निजामुद्दीन
निजामुद्दीन का घर पिलखाना के सेकेंड बाइ लेन में हैं. उसकी सात बहनें व तीन भाई हैं. पिता अबुल कादेर ने बताया कि 30 वर्षो से वह पैर के दर्द से परेशान है. दर्द व आर्थिक तंगी की वजह से वह अपने बेटे की कानूनी कार्रवाई में बहुत कुछ नहीं कर सके. कुछ वर्षो पहले उनकी तबीयत अधिक खराब होने की वजह से बेटा पैरोल पर जेल से छूटा था. उसी समय वह मानसिक रूप से परेशान था. अन्य आरोपियों के बरी होने व मामले की सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से मदद नहीं करने के कारण वह हम सबों से बेहद खफा था. यही वजह रहा कि वह मानसिक रोगी बन गया. कुछ महीनों से जेल में उसका इलाज भी चल रहा है, बावजूद इसके उसे क्यों अन्य कैदियों के साथ रखा गया.

अकरम हत्याकांड में दूसरा भाई भी जेल में
एक फरवरी 2005 को यानी हसीबुल को उस्तुरा मारने की घटना के 22 दिनों बाद पिलखाना के थर्ड बाइ लेन में कांग्रेस नेता मोहम्मद अकरम की गोली मार कर हत्या की गयी थी. इस मामले में सात के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करायी गयी. सात आरोपियों में से एक आरोपी शेख नूर है, जो शेख निजामुद्दीन का अपना भाई है. शेख नूर भी अकरम हत्याकांड में प्रेसिडेंसी जेल में कैद है.

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