UP में बंद पड़ी मिलों की जमीन पर बसेगा रोजगार का नया ठिकाना! इन जिलों में बनेगा बड़ा टेक्सटाइल नेटवर्क, जानें किन शहरों की बदलेगी तस्वीर
टेक्सटाइल पार्क से बढ़ेंगे निवेश और रोजगार के अवसर (सांकेतिक तस्वीर )
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी में है. मऊ, कानपुर, सीतापुर सहित पांच जिलों में बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन पर टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाएंगे. इससे नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
UP Textile Jobs: उत्तर प्रदेश में कपड़ा उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी है. मऊ से लेकर कानपुर और सीतापुर तक टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाएंगे. खास बात यह है कि इसके लिए बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार की इस पहल से नए निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
पांच जिलों में तैयार होगा नया प्लान
मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हस्तशिल्प, खादी एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने इन पार्कों के लिए जमीन चिह्नित कर ली है. जमीन की पैमाइश कराकर उसकी वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट भी मांगी गई है. जरूरत के अनुसार अतिरिक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी.
सड़क, बिजली और पानी की होगी सुविधा
पार्क विकसित होने के बाद यहां निवेशकों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तैयार की जाएंगी. इसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके बाद निवेशकों को औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे. प्रस्ताव को अगले महीने होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है.
गुजरात-महाराष्ट्र के कारोबारी भी उत्सुक
उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर में दूसरे राज्यों के कारोबारियों की दिलचस्पी बढ़ी है. अहमदाबाद, सूरत और मुंबई के कई कपड़ा उद्यमियों ने यूपी में निवेश की इच्छा जताई है. अधिकारियों के मुताबिक, सस्ता श्रम, अनुकूल औद्योगिक माहौल और बड़े बाजार तक आसान पहुंच इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं. गुजरात और महाराष्ट्र में औद्योगिक जमीन की कमी भी कारोबारियों को यूपी की ओर आकर्षित कर रही है.
पांच जगह पहले से भी चल रहा काम
वाराणसी के रमना, अमरोहा, बरेली के बहेड़ी, संतकबीर नगर के मगहर और बिजनौर के नगीना में पहले से संत कबीर टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जा रहे हैं. इन परियोजनाओं में करीब 50 से 80 एकड़ तक जमीन पर अवस्थापना सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. हस्तशिल्प एवं वस्त्रोद्योग खादी मंत्री राकेश सचान के मुताबिक, कपड़ा उद्योग की बढ़ती मांग को देखते हुए नए पार्क तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि निवेशकों की रुचि को देखते हुए प्रस्ताव अगले महीने कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.
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