रायबरेली में राहुल गांधी के सामने ‘0’ का चक्रव्यूह, क्या 2027 में कांग्रेस की किस्मत बदलेगी या दूर रहेंगे सुनहरे दिन?
राहुल गांधी
UP News: राहुल गांधी रायबरेली में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की जमीन मजबूत करने की तैयारी में हैं. अपने दौरे में उन्होंने व्यापारियों और स्थानीय लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान का भरोसा दिया.
UP Politics: उत्तर प्रदेश के रायबरेली में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने की तैयारी शुरू कर दी है. रायबरेली से सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अलग-अलग वर्गों के लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब चार लाख मतों के अंतर से राहुल गांधी की जीत ने कांग्रेस को नई उम्मीद दी है. हालांकि, विधानसभा चुनाव में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती रायबरेली जिले की छह विधानसभा सीटों में अपना खाता खोलने की है.
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा क्यों है अहम?
राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे. बुधवार को उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं से मुलाकात की. उनका यह दौरा भले ही दिशा (DISHA) की बैठक में शामिल होने के लिए था, लेकिन इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सांसद बनने के बाद राहुल गांधी लगातार रायबरेली का दौरा कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दों के साथ संगठन की स्थिति को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं.
व्यापारियों ने राहुल गांधी के सामने क्या मुद्दे उठाए?
इस दौरान राहुल गांधी ने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधिमंडलों और व्यापारियों से भी मुलाकात की. प्रभु टाउन में सर्राफा व्यापारी फाना त्रिवेदी के आवास पर हुई बैठक में व्यापारियों ने सोना-चांदी के कारोबार में गिरावट, महंगाई और बाजार में घटती क्रयशक्ति जैसे मुद्दे उठाए. राहुल गांधी ने उनकी समस्याएं सुनीं और उनकी आवाज सड़क से संसद तक उठाने का भरोसा दिया.
केमिस्ट कारोबारियों ने भी रखी अपनी समस्या
भुएमऊ गेस्ट हाउस में राहुल गांधी ने केमिस्ट प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की. दवा कारोबारियों ने ऑनलाइन माध्यम से बिना चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की बिक्री और इससे पारंपरिक दवा कारोबार पर पड़ रहे असर की समस्या उठाई. राहुल गांधी ने उनकी बात सुनी. इस तरह अपने दौरे के दौरान उन्होंने व्यापारियों और दवा कारोबारियों समेत अलग-अलग वर्गों के लोगों से संवाद किया.
छह सीटें, लेकिन कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं
रायबरेली जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं. इनमें रायबरेली सदर, हरचंदपुर, बछरावां, सरेनी, ऊंचाहार और सलोन शामिल हैं. इनमें से पांच विधानसभा सीटें रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले की सभी छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीत नहीं सकी.
2022 में भाजपा-सपा के बीच बंटा था रायबरेली
2022 में भाजपा ने रायबरेली सदर और सलोन सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि हरचंदपुर, बछरावां, सरेनी और ऊंचाहार सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी हुए थे. हालांकि, ऊंचाहार से सपा विधायक मनोज पांडेय अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं. ऐसे में वर्तमान राजनीतिक समीकरण 2022 के चुनावी नतीजों से अलग नजर आता है.
सोनिया गांधी के दौर में कांग्रेस का दबदबा
रायबरेली लंबे समय से गांधी परिवार और कांग्रेस की राजनीति का अहम केंद्र रहा है. सोनिया गांधी 2004 में रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरी थीं. उस समय जिले में कांग्रेस के पास अखिलेश सिंह के रूप में एक विधायक था. इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रायबरेली में मजबूत प्रदर्शन किया और उसके टिकट पर पांच विधायक चुने गए.
2007 में कांग्रेस ने पांच सीटों पर दर्ज की थी जीत
2007 में बछरावां से राजा राम त्यागी, सलोन से शिव बालक पासी, सरेनी से अशोक कुमार सिंह, ऊंचाहार से अजय पाल सिंह और हरचंदपुर से शिवगणेश लोधी कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे. वहीं रायबरेली सदर से अखिलेश सिंह निर्दलीय विधायक चुने गए थे. उस चुनाव में रायबरेली जिले की इन सीटों पर सपा, बसपा और भाजपा अपना खाता नहीं खोल सकी थीं.
2012 में कांग्रेस का फिर नहीं खुला खाता
2007 के मजबूत प्रदर्शन के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिले की एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही. 2017 में पार्टी ने रायबरेली सदर और हरचंदपुर सीट पर जीत दर्ज की. रायबरेली सदर से अदिति सिंह और हरचंदपुर से राकेश सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे. हालांकि, बाद में दोनों ही भाजपा में शामिल हो गए. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फिर सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.
राहुल की जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जगी उम्मीद
2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव मैदान में उतरे और करीब चार लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की. राहुल गांधी को रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी पांच विधानसभा सीटों पर बड़ी बढ़त मिली. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस जीत से जिले में पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है.
स्थानीय मुद्दों पर भी राहुल का फोकस
राहुल गांधी के सांसद बनने के बाद कांग्रेस रायबरेली में संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इससे पहले राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण कर दलित समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश की थी. इस बार व्यापारियों से मुलाकात को भी पार्टी की इसी जमीनी पहुंच की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.
2027 में सपा-कांग्रेस गठबंधन बनेगा बड़ा सवाल
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था और दोनों दलों का प्रदर्शन बेहतर रहा था. अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी अगर दोनों दल साथ आते हैं, तो रायबरेली में सीट बंटवारा अहम मुद्दा होगा. जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर फिलहाल सपा का मजबूत आधार है. ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस को कितनी और कौन-कौन सी सीटें मिलेंगी.
सीट बंटवारे पर फंस सकता है पेंच
2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था. उस दौरान रायबरेली की कुछ सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने भी उतरे थे. इसलिए 2027 में गठबंधन की स्थिति और सीटों का बंटवारा कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती होगी. दूसरी ओर भाजपा भी रायबरेली में अपने संगठन और विकास के मुद्दों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी.
क्या 2027 में कांग्रेस का खुलेगा खाता?
2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए रायबरेली में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की बड़ी परीक्षा होगा. एक तरफ राहुल गांधी की 2024 की लोकसभा जीत से पार्टी को उम्मीद मिली है, तो दूसरी तरफ 2022 में सभी विधानसभा सीटों पर मिली हार उसके सामने बड़ी चुनौती भी है. कांग्रेस के लिए सिर्फ सांसद की लोकप्रियता को विधानसभा सीटों की जीत में बदलना आसान नहीं होगा.
राहुल गांधी के सामने विरासत बचाने की चुनौती
अब राहुल गांधी के सामने चुनौती रायबरेली में अपनी व्यक्तिगत लोकसभा जीत को कांग्रेस के संगठनात्मक और विधानसभा प्रदर्शन में बदलने की है. इसके लिए पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहने और चुनावी गठबंधन की रणनीति तय करने की जरूरत होगी. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में यह देखना अहम होगा कि क्या राहुल गांधी रायबरेली में कांग्रेस का खाता खुलवा पाते हैं और क्या पार्टी यहां गांधी परिवार के पुराने राजनीतिक प्रभाव को फिर मजबूत कर पाती है.
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